Israel-Lebanon peace agreements : लंबे समय से युद्ध की आग में झुलस रहे इजरायल और लेबनान के बीच आखिरकार शांति की पहली किरण दिखाई दी है। इसी के साथ मिडल ईस्ट से क्षेत्रीय तनाव रोकने के लेकर ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। इजरायल और लेबनान ने अमेरिका की मध्यस्थता में एक ऐतिहासिक फ्रेमवर्क (Historical Framework) समझौते पर दस्तखत किए हैं।
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वाशिंगटन में चार दिनों की बातचीत के बाद यह सहमति बनी। खबरों के अनुसार,अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (US Secretary of State Marco Rubio) ने इजराइल और लेबनान के राजदूतों के साथ शुक्रवार को एक समझौते की घोषणा की, जिसे इजराइली बलों और लेबनान के चरमपंथी गुट हिजबुल्लाह (The extremist group Hezbollah) के बीच महीनों से जारी संघर्ष के बाद शांति की दिशा में पहला कदम बताया जा रहा है।
अधिकारियों ने समझौते के बारे में कोई जानकारी नहीं दी, जिस पर अमेरिका में इज़राइल के राजदूत येचिएल लीटर और अमेरिका में लेबनान की राजदूत नादा हमदेह (Ambassador Nada Hamdeh) ने साइन किए। हालांकि इस समझौते की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
हिजबुल्लाह को माननी होंगी ये शर्तें
इस समझौते की सबसे बड़ी शर्त यह है कि दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह को अपनी सभी सैन्य गतिविधियां (Historical Framework) पूरी तरह बंद करनी होंगी। हिजबुल्लाह को इस क्षेत्र से अपने लड़ाकों और हथियारों (fighters and weapons) को पूरी तरह हटाना होगा। समझौते के अनुसार, लेबनान की सेना दक्षिणी हिस्से में प्रभावी सुरक्षा जिम्मेदारी संभालेगी। इसके बदले में इजरायली रक्षा बल (Israel Defense Forces) यानी आईडीएफ (IDF) धीरे-धीरे लेबनानी क्षेत्र से पीछे हटेंगे।
इजरायली राजदूत ने साफ किया कि इजरायल का मकसद लेबनान के साथ बेहतर पड़ोसी संबंध बनाना है ताकि भविष्य में तेल अवीव से बेरूत तक लोग बिना किसी डर के आ-जा सकें। हालांकि, यह सब इस बात पर निर्भर करेगा कि हिजबुल्लाह के आतंकी ढांचे (Hezbollah’s terrorist infrastructure) को वहां से कितनी जल्दी और पूरी तरह से खत्म किया जाता है।
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हालांकि, हिजबुल्लाह ने अमेरिका समर्थित प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है। संगठन के सांसद हसन फदलल्लाह (MP Hassan Fadlallah) ने कहा कि हिजबुल्लाह किसी भी हाल में अपने हथियार नहीं छोड़ेगा। उनका आरोप है कि इस समझौते के जरिए लेबनान को गृहयुद्ध की ओर धकेला जा रहा है।