Javelin star Yashvir Singh : कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के जैवलिन थ्रो इवेंट में भारत ने अपना परचम लहरा दिया।नए जैवलिन स्टार यशवीर सिंह भी पोडियम फिनिश करने में कामयाब रहे। श्रीलंका के युवा एथलीट रुमेश पाथिरागे ने गोल्ड मेडल जीता, जबकि भारत के नीरज चोपड़ा ने सिल्वर और यशवीर सिंह ने ब्रॉन्ज अपने नाम किया । इसी के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का जैवलिन थ्रो फाइनल मुकाबला काफी रोमांचक मोड़ पर खत्म हुआ। मेडल की रेस में टिके रहने के लिए भारत के युवा एथलीट यशवीर सिंह (Young athlete Yashveer Singh) को अपने करियर के सबसे बेहतरीन प्रदर्शन की जरूरत थी और वो ऐसा करने में कामयाब रहे।
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कॉमनवेल्थ गेम्स में पदार्पण कर रहे यशवीर सिंह ने प्रतियोगिता का सबसे रोमांचक पल अपने नाम किया। पहले पांच प्रयासों तक वह पदक की दौड़ में पीछे थे । लेकिन छठे और आखिरी प्रयास में 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ (PB) थ्रो कर उन्होंने कांस्य पदक जीत लिया। इस थ्रो के साथ उन्होंने अपना पुराना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 83.72 मीटर भी तोड़ दिया। यश ने पूर्व विश्व चैम्पियन एंडरसन पीटर्स और मौजूदा ओलंपिक चैम्पियन अरशद नदीम जैसे दिग्गजों को भी पीछे छोड़ दिया।
देवसर गांव से शुरू हुआ सफर
भिवानी के देवसर गांव से शुरू हुआ सफर
22 अक्टूबर 2001 को हरियाणा के भिवानी जिले के देवसर गांव से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पोडियम तक के सफर में यशवीर की प्रेरणा उनके पिता राय सिंह रहे। राय सिंह खुद एक नेशनल लेवल के जैवलिन थ्रो खिलाड़ी और रेलवे के कोच रहे हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पोडियम तक के सफर में यशवीर की प्रेरणा उनके पिता राय सिंह रहे। राय सिंह खुद एक नेशनल लेवल के जैवलिन थ्रो खिलाड़ी और रेलवे के कोच रहे हैं।
कड़ी ट्रेनिंग
साल 2015 में सिर्फ 14 साल की उम्र में यशवीर ने अपने पिता के साथ जैवलिन थ्रो का अभ्यास शुरू किया। रन-अप, ग्रिप और रिलीज तकनीक पर घंटों पसीना बहाया गया। जिसके चलते उन्होंने अंडर-18 नेशनल लेवल में लगातार दो बार नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। फिर भारतीय अंडर-20 फेडरेशन कप में यशवीर ने स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा का पुराना मीट रिकॉर्ड ध्वस्त कर सुर्खियां बटोरीं।
इसके बाद 2022 में उन्होंने पहली बार 80 मीटर का आंकड़ा पार किया. वहीं, जून 2026 में 83.72 मीटर थ्रो करके उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स का टिकट पक्का किया था। अब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली ही बार में अपने पिता का सपना पूरा कर दिखाया।
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