Kalashtami 2026: भगवान भैरव को समर्पित कालाष्टमी तिथि का विशेष् महत्व है।देवों के देव महादेव (भगवान शिव) के अत्यंत उग्र भगवान भैरव (काल भैरव), पराक्रमी और विनाशकारी अवतार हैं। इन्हें तंत्र-मंत्र का अधिष्ठाता, समय (काल) का नियंत्रक और दुष्टों को दंड देने के कारण ‘दंडपाणि’ भी कहा जाता है। हिंदू धर्म की सनातन और तांत्रिक परंपराओं में भगवान भैरव की पूजा का सर्वोच्च स्थान है।
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पंचांग के अनुसार भगवान भैरव की कृपा बरसाने वाली आषाढ़ मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि 7 जुलाई 2026 को दोपहर 01:24 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 08 जुलाई 2026 को दोपहर 12:21 बजे समाप्त होगी। ऐसे में कालाष्टमी व्रत की पूजा 7 जुलाई 2026, मंगलवार के दिन की जाएगी। हिंदू मान्यता के अनुसार जो कालाष्टमी मंगलवार और रविवार के दिन पड़ती है, उसका धार्मिक महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
धार्मिक कथा
शिव महापुराण के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। ब्रह्मा जी ने अपने पांचवें मुख से भगवान शिव के प्रति अपमानजनक शब्द कहे। ब्रह्मा जी के उस अहंकार को नष्ट करने के लिए भगवान शिव के क्रोध से अत्यंत दिव्य और भयानक रूप वाले ‘काल भैरव’ प्रकट हुए।
भैरव जी ने अपने नाखून से ब्रह्मा जी का वह पांचवां सिर काट दिया। इस कारण उन पर ब्रह्महत्या का पाप लगा और वे तीन लोकों में भटकते हुए अंत में काशी (वाराणसी) पहुंचे, जहां उनके हाथ से ब्रह्मा जी का कपाल (शीश) छूटा और वे पाप मुक्त हुए।
उपाय
काल भैरव का वाहन कुत्ता माना जाता है। इस दिन काले कुत्ते को सरसों के तेल से चुपड़ी हुई रोटी खिलाने से राहु-केतु के दोष शांत होते हैं और स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
तामसिक भोजन, शराब या किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों के सेवन से पूरी तरह दूर रहें।