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Kalashtami 2026 :  भैरव अष्टमी पर करे ये उपाय, नकारात्मक ऊर्जा से मिलेगी मुक्ति ,  राहु-केतु के दोष होंगे दूर

सनातन धर्म में भगवान शिव के रौद्र रूप की पूजा अर्चना करने का विधान है। शिव का रौद्र रूप काल भैरव को समर्पित है। हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी कहा जाता है।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Kalashtami 2026 :  सनातन धर्म में भगवान शिव के रौद्र रूप की पूजा अर्चना करने का विधान है। शिव का रौद्र रूप काल भैरव को समर्पित है। हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी कहा जाता है। वैशाख माह में आने वाली कालाष्टमी का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा से शत्रुओं का नाश, नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति, और राहु-केतु के दोष दूर होते हैं। मान्यता है कि काल भैरव की पूजा से भय से मुक्ति, आत्मविश्वास और जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है। इस दिन पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

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अप्रैल में कालाष्टमी का व्रत 10 अप्रैल 2026, शुक्रवार के दिन है।

विधि-विधान से काल भैरव की पूजा
भगवान काल भैरव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के लिए सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें और रात्रि में विधि-विधान से काल भैरव की पूजा करें। इस विशेष पूजा में सरसों के तेल का दीपक जलाकर काल भैरव चालीसा का पाठ और मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

उपाय
कालाष्टमी के दिन कुत्तों को भोजन कराना एक महत्वपूर्ण परंपरा है। मान्यता है कि कुत्ता भगवान काल भैरव का वाहन होता है, इसलिए उसे भोजन कराने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

चौमुखी दीपक
कालाष्टमी के दिन सरसों के तेल का एक चौमुखी दीपक मुख्य द्वारा पर जलाएं। इस दीपक की लौ से काजल बनाएं। इस काजल का टीका घर में मौजूद बच्चों और अन्य सदस्यों के कान के पीछे लगाएं

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जाप
कालाष्टमी वाले दिन ॐ कालभैरवाय नम: मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।

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