Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. उत्तर प्रदेश
  3. Kanpur Dehat News : करीब 400 करोड़ जमीन घोटाले में DM कपिल सिंह का सख्त एक्शन, पूर्व एडीएम व बैंक अधिकारियों पर FIR

Kanpur Dehat News : करीब 400 करोड़ जमीन घोटाले में DM कपिल सिंह का सख्त एक्शन, पूर्व एडीएम व बैंक अधिकारियों पर FIR

By santosh singh 
Updated Date

कानपुर देहात। योगी सरकार (Yogi Government) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को जारी रखते हुए बड़ी कार्रवाई की है। कानपुर देहात (Kanpur Dehat) के भोगनीपुर क्षेत्र में करीब 400 करोड़ के जमीन घोटाले में सख्त कार्रवाई की गई है। थर्मल पावर प्लांट (Thermal Power Plant) लगाने के नाम पर हुई वित्तीय अनियमितताओं को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूर्व एडीएम और संबंधित कंपनियों व बैंकों के अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।

पढ़ें :- अखिलेश का योगी सरकार से सवाल- क्या किसान को ‘1 रुपये किलो’ आलू की क़ीमत देने से बनेगी ‘1 ट्रिलियन’ डॉलर की इकोनॉमी

FIR-I.I.F.-I_31682028260047

यह मामला साल 2011 से शुरू हुआ था। शासन ने चपरघटा और आसपास के गांवों (कृपालपुर, भुण्डा, रसूलपुर और भरतौली) की ग्राम समाज और निजी काश्तकारों की जमीन थर्मल प्लांट के लिए आवंटित की थी। जिलाधिकारी कपिल सिंह के संज्ञान में जब यह आया कि बिना सरकार की अनुमति के सरकारी जमीन को बैंकों में बंधक रखा गया है, तो उन्होंने जांच के आदेश दिए। जांच में पता चला कि कंपनियों ने अफसरों के साथ मिलकर राजस्व क्षति पहुंचाई है। इसके बाद भोगनीपुर तहसीलदार प्रिया सिंह (Bhognipur Tehsildar Priya Singh) की तहरीर पर थाना मूसानगर में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है।

थर्मल प्लांट लगाने का था प्रस्ताव

कानपुर देहात के भोगनीपुर में वर्ष 2011 में हिमावत पावर और लैन्को अनपरा पावर कंपनियों को थर्मल पावर प्रोजेक्ट लगाने के लिए 7 गांवों की लगभग 2332 एकड़ भूमि दी गई थी। समझौते की शर्तों के अनुसार, इन कंपनियों को 3 साल के भीतर निर्माण कार्य शुरू कर बिजली उत्पादन करना था, लेकिन 15 साल बीत जाने के बाद भी कंपनियों ने वहां कोई काम नहीं किया और वह सरकारी तथा अधिग्रहीत भूमि आज भी खाली पड़ी है।

पढ़ें :- Gen Z के लिए योगी सरकार की नई पहल: हर माह विद्यार्थियों से संवाद करेंगे IAS-IPS और IFS अधिकारी

इन कंपनियों ने धोखाधड़ी करते हुए भूमि समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया। प्रशासन को यह भी शिकायत मिली कि पावर कंपनियों ने इस सरकारी भूमि को गिरवी रखकर बैंकों से 1500 करोड़ रुपये का कर्ज ले लिया। कंपनियों ने न तो बिजली घर बनाया और न ही बैंकों का कर्ज चुकाया।

जांच में क्या आया सामने?

जांच में सामने आया है कि इस पूरे मामले में कंपनियों और बैंकों के साथ-साथ तत्कालीन अपर जिलाधिकारी (भूमि अध्याप्ति) ओ.के. सिंह की भी मिलीभगत थी।
जब बैंकों ने इस कीमती भूमि को अवैध रूप से नीलाम करने की कोशिश की, तो वर्तमान जिलाधिकारी कपिल सिंह ने इसका संज्ञान लिया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तत्काल एक्शन लिया गया। नीलामी पर रोक लगाकर इसे सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराया गया।

वर्तमान में इस जमीन की कीमत सर्किल रेट के मुताबिक 300 करोड़ रुपये से अधिक है, जबकि बाजार मूल्य इससे भी कहीं अधिक है। शासन के निर्देश पर अब दोनों कंपनियों, संबंधित बैंकों (IDBI, कैनरा, PNB) के अधिकारियों और दोषी प्रशासनिक अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ थाना मूसानगर में जालसाजी और साजिश की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है।

 

पढ़ें :- योगी सरकार का बड़ा बयान, 'राम मंदिर में कोई घोटाला नहीं हुआ', 3300 करोड़ का हिसाब-किताब सही, बस यहां हुई हेराफेरी
Advertisement