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ओडिशा के सरकारी स्कूल में 312 छात्र और 10 शिक्षक दो दिन से फंसे, 10 फीट पानी में डूबा…

By Harsh 
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केंद्रपाड़ा: ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में बाढ़ के हालात के बीच एक सरकारी आवासीय स्कूल में 312 छात्र और 10 शिक्षक दो दिनों से फसे हुए है। कुलासाही गांव स्थित कुलासाही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति स्कूल शनिवार से चारों ओर पानी से घिरा हुआ है। स्कूल की ग्राउंड फ्लोर पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है जिसके बाद छात्रों और शिक्षकों को पहली मंजिल पर रहना पड़ रहा है। पट्टामुंडई ब्लॉक की पेन्थापाला ग्राम पंचायत में स्थित यह स्कूल करीब 15 साल पुराना है। ब्राह्मणी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद शनिवार को बाढ़ का पानी स्कूल परिसर में तेजी से पहुंचा। देखते ही देखते निचला हिस्सा करीब 10 फीट पानी में डूब गया।

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पहली मंजिल पर रहने को मजबूर छात्र

बाढ़ का पानी बढ़ने के बाद स्कूल में रहने वाले सभी छात्रों और शिक्षकों को ऊपर की मंजिल पर जाना पड़ा। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल सभी सुरक्षित हैं, लेकिन तेज बहाव के चलते राहत और बचाव दल के लिए स्कूल तक पहुंचना आसान नहीं है। पट्टामुंडई के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी अजीत बारिक के मुताबिक स्कूल में करीब एक सप्ताह तक खाना बनाने के लिए एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन से लगातार संपर्क किया जा रहा है और जल्द सहायता पहुंचाने का भरोसा मिला है।

उधर केंद्रपाड़ा के कलेक्टर रघुराम आर. अय्यर ने पट्टामुंडई के बीडीओ शीतल अग्रवाल और जिला कल्याण अधिकारी अरबिंदा रे को जरूरी निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से छात्रों और शिक्षकों के लिए भोजन, पीने का पानी और अन्य राहत सामग्री उपलब्ध कराने को कहा गया है।

हर साल भर जाता है स्कूल, फिर भी नहीं हटाए गए बच्चे

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स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि इमारत नदी के किनारे निचले इलाके में बनी है और यहां हर साल बाढ़ का पानी पहुंचता है। एक शिक्षक ने बताया कि इस बार पानी का बहाव काफी तेज है और इसी वजह से बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।

स्कूल के एक कर्मचारी ने सवाल उठाया कि जब नदी का पानी बढ़ने की आशंका थी तभी छात्रों को सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं भेजा गया। उनका कहना है कि समय रहते बच्चों को वहां से निकाल लिया जाता तो मौजूदा स्थिति से बचा जा सकता था।

बच्चों के परिजन भी परेशान

स्कूल में फंसे बच्चों के परिजनों की चिंता भी बढ़ गई है। परिजनों ने अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि फिलहाल मोबाइल फोन के जरिए ही बच्चों से संपर्क हो पा रहा है। परिजनों के मुताबिक उनके बच्चों ने फोन पर बताया कि पहली मंजिल के कमरों में बड़ी संख्या में छात्रों को एक साथ रहना पड़ रहा है। जगह कम होने के कारण बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अधिकारियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती तेज बहाव के बीच स्कूल तक राहत सामग्री और जरूरी सहायता पहुंचाने की है। प्रशासन का कहना है कि फंसे छात्रों और शिक्षकों तक भोजन पानी और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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