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BSP से निकाले गए नेता अपने गलत कारनामों से बचने के लिए सत्ताधारी पार्टी में हुए शामिल: मायावती

By शिव मौर्या 
Updated Date

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के करीब आते ही बसपा सुप्रीमो मायावती ताबड़तोड़ एक्शन में हैं। वो बीते कुछ दिनों में पार्टी के ​तीन दिग्गज नेताओं को पार्टी से बाहर कर दिया है। वहीं, पहले भी कई नेताओं पर कार्रवाई हुई थी, जिसके बाद ज्यादातर नेताओं ने सत्ताधारी पार्टी का दामन थाम लिया। अब मायावती ने कहा, बसपा से निकाले गए नेता अपने गलत कारनामों से बचने के लिए सत्ताधारी पार्टी में शामिल हुए।

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मायावती ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, सच्ची मंशा के मुताबिक़, सर्वसमाज के हित व कल्याण के लिये समर्पित है और इसीलिये पार्टी में नेताओं की नहीं बल्कि पूरे तन, मन, धन से समर्पित अम्बेडकरवादी कार्यकर्ताओं की ही फौज हर स्तर पर अधिकतर सक्रिय है। यही मान्यवर कांशीराम जी द्वारा पार्टी व मूवमेन्ट के हित में स्थापित परम्परा भी है।

उन्होंने आगे लिखा, इसीलिये ब्राह्मण समाज व अन्य सभी समाज के जो भी लोग अभी तक पार्टी से निकाले गये हैं या निकाले जा रहे हैं या वे अपने निजी स्वार्थ में दूसरी पार्टियों में चले गये हैं या फिर वे अपने ग़लत कारनामों की वजह से उनसे बचने के लिये ख़ासकर सत्ताधारी पार्टी में शामिल हो गये हैं, तो उनका पार्टी के प्रति समर्पण भाव लोगों की निगाह में भी उनके कार्यों के ऑकलन के आधार पर काफी सशंकित व निराशाजनक बना रहा है, क्योंकि ख़ासकर बी.एस.पी. सरकार के दौरान भी ऐसे लोगों ने अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ के लिए ही पार्टी से फायदा ज़्यादा उठाया है और अपने समाज व पार्टी के हित के लिए वे लोग अधिकतर निष्क्रिय व उदासीन ही बने रहे हैं।

इतना ही नहीं बल्कि इन्हीं सब कारणों से उन लोगों ने अपने समाज को भी सही से बी.एस.पी. में नहीं जोड़ा है, जो कि पार्टी की अपेक्षा के विरुद्ध इनका यह सब कृत्य होने की वजह से पिछले कई लोकसभा व विधानसभा आमचुनावों में पार्टी को काफी नुकसान भी उठाना पड़ा है, जो किसी से भी छिपा हुआ नहीं है। किन्तु उसके बाद से पार्टी में लम्बे अरसे से ईमानदार व हर मामले में पार्टी के प्रति लगातार समर्पित एवं निष्ठावान चले आ रहे पार्टी के वरिष्ठ लोगों द्वारा आएदिन नये कर्मठ व ईमानदार लोगों व ख़ासकर युवाओं को पार्टी की नर्सरी में तैयार किया जाता रहा है, जो यह अभियान पूरी तरह से जारी है।

बसपा सुप्रीमो ने आगे लिखा, अब वे लोग काफी हद तक पार्टी की अपेक्षा के अनुसार जी-जान से लगातार लगे हुये हैं। पार्टी को पूरी उम्मीद है कि ये सभी नये व पुराने लोग हर मामले में ज़्यादा बेहतर, साफ-सुथरे व मिशनरी मानसिकता के बनकर उभरेंगे और वे सच्चे अम्बेडकरवादी एवं संविधानवादी संघर्ष के भरपूर तौर पर काम आयेंगे।

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इसके साथ ही, पार्टी ख़ासकर ब्राह्मण समाज को यह भी विश्वास दिलाना चाहती है कि वे अपनी पूरी मज़बूती के साथ पार्टी से जुड़े रहें और उन्हें हर चुनाव में उनकी तैयारी के आधार पर उनकी भागीदारी यानी चुनावी उम्मीदवार बनाने तथा सरकार बनने पर सन 2007 की तरह ही इनको व अन्य सभी समाज को भी पूरा-पूरा उचित मान-सम्मान ज़रूर दिया जाता रहेगा। और सर्वसमाज आधारित ऐसी अपनी बी.एस.पी. पार्टी को ज़मीनी स्तर पर तैयार करने के मामले में अब विशेषकर दलित समाज को ही अपनी अह्म भूमिका निभानी है। वैसे बी.एस.पी. की नर्सरी, सर्वसमाज के हसीन गुलदस्तों से ही, अधिकतर हरी-भरी व सजी रहती है।

 

 

 

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