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लखनऊ अंग्निकांड में बुझ गए 15 घरों के चिराग, करियर के सपने आग में राख, सवाल कब सुधरेगा सिस्टम?

By santosh singh 
Updated Date

लखनऊ। यूपी की राजधानी लखनऊ में अलीगंज कोचिंग में सोमवार को आग लगने की घटना में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 5 महिलाएं और 10 पुरुष हैं। ज्यादातर 20 से 30 साल के स्टूडेंट्स हैं। जिस बिल्डिंग में आग लगी, वह अवैध थी। इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है? आखिर सिस्टम कब सुधरेगा? और इस लापरवाही की कीमत हमारे बच्चों व हमको अपनी जान देकर कब तक चुकानी पड़ेगी?

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15 परिवारों की जिंदगी में छाए इस अंधेरे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। अब हर किसी के मन में एक ही सवाल है,आखिर जबावदेही सरकार व प्रशासन की कब तय होगी, ताकि किसी और परिवार का चिराग फिर इस तरह न बुझ जाए?

इनकी गई जान

सुखमनी (24), लखनऊ

आदित्य श्रीवास्तव (24), बिसवां, सीतापुर

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मोहम्मद अम्मार (24) लेखपड़ा बाग, बाराबंकी

नीलेश (27), निवासी हजरतगंज, लखनऊ

अब्दुल रहमान (24), बिसवां, सीतापुर

संयम विज (27) कानपुर

शहजान सिद्दीकी (18) बीकेटी, लखनऊ

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अनुक्षा (24), अवध शिल्पग्राम शांतिनगर

सागर (28), लखनऊ

ज्योति (26), निवासी ज्ञान विहार कॉलोनी कमता लखनऊ

जैनिल (26), अनूपपुर भालुमुड़ा मध्य प्रदेश

सौमाल्या (24), निवासी द्वारिका नगर नमखाना साउथ

भविष्य (23), निवासी अलीगंज

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सूरज सिंह (27), निवासी गोविंद नगर कानपुर

अनामिका

ये हुए घायल 

जयंत, लवप्रीत, मो. आसिफ, भुवन श्रीवास्तव, पंकज, शैलेंद्र, अभिषेक, पंकज जोशी, गौरव कुमार।

राजधानी लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने 15 परिवारों के घरों के चिराग बुझा दिए। अपने बेहतर भविष्य और करियर के सपने लेकर घर से निकले युवा आग की लपटों में हमेशा के लिए खो गए। इस हादसे ने न केवल पीड़ित परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कई युवा जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते रहे, लेकिन धुआं और आग की तीव्रता उनके लिए जानलेवा साबित हुई। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस दर्दनाक हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर सुरक्षा मानकों की अनदेखी कब तक लोगों की जान लेती रहेगी? क्या संबंधित संस्थानों में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्था थी? क्या प्रशासन ने समय रहते सुरक्षा मानकों की जांच की थी?

लखनऊ अग्निकांड की शुरुआती जांच में वही खामियां मिली हैं जो मालवीय नगर अग्निकांड (Malviya Nagar Fire Incident) में मिली थी। बिना फायर एनओसी (Fire NOC) के चल रहे इस तीन मंजिला कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में नियमों की धज्जियां उड़ाई गई थीं, जिसमें 15 छात्रों की जान चली गई और अब अधिकारी वैसी ही बहानेबाजी कर रहे हैं, जैसी दिल्ली में देखने को मिली थी।

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पुलिस जांच में ये भी सामने आया है कि अलीगंज योजना (Aliganj Scheme) के सेक्टर स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी का कुल क्षेत्रकुल 1992 वर्गफुट है और इसके लिए 20 अगस्त, 2014 को आवासीय नाक्शा स्वीकृत किया गया था। हालांकि, 2016 में लखनऊ विकास प्रधिकरण (Lucknow Development Authority) ने इमारत को अवैध निर्माण को लेकर मुकदमा दर्ज कराया था और मामले की सुनवाई के बाद 10 मई 2016 को बिल्डिंग को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया था। हालांकि, मालिकों के कोर्ट में आपत्ति के बाद जुलाई में ध्वस्तीकरण के आदेश को निरस्त कर दिया गया था।

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