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Mahalaxmi Vrat 2026 : आज से महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ , समृद्धि- सौभाग्य के लिए करें श्री सूक्त का पाठ

By अनूप कुमार 
Updated Date

Mahalaxmi Vrat 2026 : सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) में महालक्ष्मी को केवल धन-दौलत की ही नहीं, बल्कि समस्त प्रकार की सुख, समृद्धि, सौभाग्य, शांति और आध्यात्मिक उन्नति की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। वे ब्रह्मांड के पालनकर्ता भगवान श्री विष्णु की शाश्वत संगिनी (पत्नी) हैं और पार्वती तथा सरस्वती के साथ मिलकर ‘त्रिदेवी’ का निर्माण करती हैं। पौराणिक कथाओं, विशेषकर विष्णु पुराण और भागवत पुराण के अनुसार, महालक्ष्मी की उत्पत्ति देवताओं और असुरों द्वारा किए गए समुद्र मंथन (क्षीर सागर के मंथन) से हुई थी।

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वैदिक पंचांग के अनुसार, महालक्ष्मी व्रत के लिए भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तिथि की शुरूआत 18 सितंबर को दोपहर 01:00 पी एम से हुआ है और आज 19 सितंबर को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। उदयाति​थि के अनुसार, आज से महालक्ष्मी व्रत करना उत्तम है।

इसमें माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं और 16 सूत्र वाले धागे में 16 गांठ लगाते हैं। अंतिम दिन व्रत और पूजा के बाद विसर्जन होता है। इस व्रत को करने से संतान, धन, धान्य, जमीन, मकान, यश, कीर्ति, सफलता आदि की प्राप्ति होती है।

महालक्ष्मी व्रत का पौराणिक महत्व
महालक्ष्मी व्रत धन, यश और पारिवारिक समृद्धि के लिए रखा जाता है, जिसका उल्लेख भविष्य पुराण, स्कंद पुराण और मार्कंडेय पुराण में मिलता है। महाभारत काल में युधिष्ठिर ने खोया हुआ राज्य व धन पुनरावृत्ति के लिए श्री कृष्ण से उपाय पूछा था। तब श्री कृष्ण ने उन्हें 16 दिनों के महालक्ष्मी व्रत का विधान बताया था।

श्री सूक्त पाठ: इन दिनों में कमल गट्टा, दूर्वा (दूर्वा अष्टमी) और श्री सूक्त पाठ का विशेष फल।

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