नई दिल्ली। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने मेडिकल लापरवाही के एक बेहद गंभीर मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए उत्तर प्रदेश के सर्जन डॉक्टर राजीव लोचन को पीड़ित परिवार को करीब 12 साज बाद 2 करोड़ रुपये देने का एतेहासिक आदेश दिया है। आयोग ने कहा कि ऑपरेशन के दौरान हुई यह गलती साधारण लापरवाही नहीं, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र की सबसे गंभीर भूलों में से एक है। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि ऐसी गलती किसी मरीज की जिंदगी छीन सकती है और इस मामले में भी यही हुआ।
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डॉक्टर ने दाहिनी की जगह बाईं किडनी निकाल दी थी
56 वर्षीय शांति देवी को अप्रैल 2012 में पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई थी। जांच के बाद डॉक्टर ने बताया कि उनकी दाहिनी किडनी खराब है, जबकि बाईं किडनी पूरी तरह स्वस्थ थी। परिवार ने डॉक्टर की सलाह पर भरोसा करते हुए 6 मई 2012 को ऑपरेशन के लिए सहमति दे दी। लेकिन सर्जरी के बाद भी शांति देवी की हालत सुधरने के बजाय और बिगड़ने लगी।
कुछ समय बाद दोबारा जांच और सीटी स्कैन कराया गया तो परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। रिपोर्ट में सामने आया कि खराब दाहिनी किडनी अभी भी शरीर के अंदर मौजूद थी, जबकि डॉक्टर ने गलती से स्वस्थ बाईं किडनी निकाल दी थी। बाद में डॉक्टर ने अपनी सफाई में यह बात स्वीकार भी की कि ऑपरेशन के दौरान गंभीर चूक हुई।
डॉक्टर की लापरवाही ने महिला की जान ले ली
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मामला उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया तक पहुंचा। जांच में डॉक्टर को दोषी पाया गया और उनका मेडिकल रजिस्ट्रेशन दो साल के लिए निलंबित कर दिया गया। जांच अधिकारियों ने यह भी पाया कि डॉक्टर ने खुद को बचाने के लिए केस से जुड़े दस्तावेजों में गड़बड़ी की और फर्जी रिकॉर्ड पेश किए।
स्वस्थ किडनी निकल जाने के बाद शांति देवी को करीब दो साल तक डायलिसिस के सहारे जिंदगी बितानी पड़ी। आखिरकार 20 फरवरी 2014 को उनकी मौत हो गई। अब करीब 12 साल बाद NCDRC ने डॉक्टर को 1.5 करोड़ रुपये मुआवजा, मानसिक पीड़ा के लिए परिवार के सदस्यों को 10-10 लाख रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 1 लाख रुपये देने का आदेश दिया है। साथ ही 2014 से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने का आदेश दिया गया है।