नई दिल्ली: देशभर में NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर चिंता लगातार गहराती जा रही है। बुधवार को तमिलनाडु और गुजरात से दो और छात्रों की मौत के मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं के बाद परीक्षा रद्द होने के बाद जान गंवाने वाले छात्रों की संख्या लगभग 12 तक पहुंच गई है।
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तमिलनाडु में छात्रा ने जहर खाया
तमिलनाडु के कोयंबटूर में NEET की तैयारी कर रही 19 वर्षीय अनुकीर्तना ने बुधवार सुबह जहर खाकर जान दे दी। शुरुआती जांच में सामने आया कि उसने मौत से पहले अपने चाचा और कुछ करीबी रिश्तेदारों को व्हाट्सएप संदेश भेजे थे। संदेश में उसने लिखा कि उसने NEET परीक्षा दी थी और मेडिकल कॉलेज में दाखिले का इंतजार कर रही थी, लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद दोबारा एग्जाम देने का डर उसे लगातार परेशान कर रहा था। उसने यह भी लिखा कि उसके पिता ने उसकी पढ़ाई पर काफी पैसा खर्च किया है और अब वह उनका सामना कैसे करेगी, यह समझ नहीं पा रही है। पुलिस ने छात्रा का मोबाइल जब्त कर जांच शुरू कर दी है।
अहमदाबाद में छात्र में छठी मंजिल से छलांग लगायी
उधर, अहमदाबाद के न्यू रानीप इलाके में बुधवार रात करीब 2:30 बजे 17 वर्षीय छात्र ने आनंदम फ्लैट्स के ब्लॉक-बी की छठी मंजिल से छलांग लगा दी। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस के मुताबिक छात्र NEET की तैयारी कर रहा था। फिलहाल आत्महत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है और मामले की जांच जारी है।
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परीक्षा रद्द होने के बाद से देशभर में अब तक 12 छात्रों ने आत्महत्या की
इन दोनों घटनाओं से पहले 16 जून को देहरादून में 23 वर्षीय रिया थापा और लखनऊ में 17 वर्षीय छात्रा की मौत का मामला सामने आया था। वहीं, 12 मई को परीक्षा रद्द होने के बाद से देश के अलग-अलग राज्यों से अब तक लगभग 12 छात्रों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं, जिसने परीक्षा व्यवस्था और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
क्यों रद्द हुई थी परीक्षा
गौरतलब है कि NEET-UG 2026 की परीक्षा 3 मई को देशभर में आयोजित हुई थी, जिसमें करीब 23 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। परीक्षा के बाद कई राज्यों से प्रश्नपत्र लीक होने और कुछ अभ्यर्थियों तक पहले से पेपर पहुंचने के आरोप लगे। जांच एजेंसियों को शुरुआती जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद NTA ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी। इसके बाद केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों की समीक्षा के आधार पर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया। इसी बीच लगातार सामने आ रही ये घटनाएं छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर रही हैं।