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NEET-UG कंप्यूटर आधारित कराने की मांग, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा माम​ला,

By Harsh Gautam 
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NEET Paper Leak: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर नई याचिका में परीक्षा को तुरंत कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराने की मांग उठाई गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने मौजूदा पेन-पेपर सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। याचिका में कहा गया है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) अब परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र की छपाई, ट्रांसपोर्ट और स्टोरेज जैसी प्रक्रियाओं में कई ऐसे मौके होते हैं, जहां से लीक की आशंका बनी रहती है।

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‘जब सरकार खुद मान चुकी है तो देरी क्यों?’

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि केंद्र सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है कि 2027 से NEET परीक्षा CBT मोड में कराई जाएगी। ऐसे में अगर डिजिटल सिस्टम ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है, तो इसे लागू करने में और इंतजार क्यों किया जा रहा है। याचिका में दावा किया गया कि ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली में सुरक्षा के ज्यादा आधुनिक इंतजाम मौजूद रहते हैं। इसमें डिजिटल एन्क्रिप्शन, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और AI आधारित मॉनिटरिंग जैसी तकनीकें शामिल होती हैं, जिससे गड़बड़ी की संभावना काफी कम हो जाती है।

री-टेस्ट को ऑनलाइन कराने की भी मांग

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में 21 जून को प्रस्तावित री-टेस्ट को भी कंप्यूटर आधारित तरीके से कराने की अपील की गई है। इसके अलावा भविष्य की परीक्षाओं के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करने की मांग की गई है, ताकि परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सके। याचिकाकर्ताओं ने NTA की जगह एक स्वतंत्र और जवाबदेह संस्था गठित करने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी कानूनी रूप से जवाबदेह होनी चाहिए, ताकि किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में कार्रवाई तय हो सके।

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हाई लेवल मॉनिटरिंग कमेटी की मांग

याचिका में एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति बनाने की भी मांग की गई है। इसमें रिटायर्ड जज, साइबर एक्सपर्ट, वैज्ञानिक और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल करने की बात कही गई है। साथ ही पेपर लीक में शामिल आरोपियों और कथित कोचिंग नेटवर्क के खिलाफ फास्ट-ट्रैक जांच चलाने की मांग भी अदालत से की गई है। सीबीआई से 2026 पेपर लीक मामले में चार सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने की मांग भी याचिका का हिस्सा है।

22 लाख छात्रों की परीक्षा पर उठे थे सवाल

गौरतलब है कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में 22 लाख से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया था। परीक्षा के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पेपर लीक के आरोप तेजी से सामने आए थे। दावा किया गया कि प्रश्नपत्र व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर पहले से वायरल हो चुका था। विवाद बढ़ने के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई थी। इस याचिका को आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह, डॉ. ध्रुव चौहान और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया है।

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