चेन्नई। तमिलनाडु की विजय सरकार ने राज्य के बुनियादी ढांचे और पर्यावरण नीति को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में नियम 110 के तहत चेन्नई के परंदूर ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को पूरी तरह से रद करने की घोषणा की है। साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि चेन्नई में दूसरे एयरपोर्ट की जरूरत है, लेकिन यह विकास किसानों की उपजाऊ भूमि और जल निकायों की कीमत पर हरगिज नहीं होगा।
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भारी जन-आक्रोश और पर्यावरण चिंताओं के कारण वापस लिया गया फैसला
बता दें कि करीब 27,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह प्रोजेक्ट शुरुआत से ही विवादों में घिरा था। इस फैसले के पीछे का मुख्य कारण है किसानों का आंदोलन। जिसमें कांचीपुरम जिले के परंदूर और आसपास के 12 गांवों के किसान पिछले लंबे समय से उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। इसका दुसरा कारण है पर्यावरण को भारी नुकसान। भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) और पर्यावरण विशेषज्ञों की रिपोर्ट में सामने आया था कि प्रस्तावित साइट पर बड़े पैमाने पर वेटलैंड्स यानी आर्द्रभूमि और जल निकाय मौजूद हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ने का खतरा था। इसके अलावा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री विजय ने प्रभावित एगनापुरम और अन्य गांवों का दौरा कर जनता को भरोसा दिलाया था कि उनकी आजीविका में कोई परेशानी नहीं होगी।
नए विकल्प और मौजूदा एयरपोर्ट का विस्तार
चेन्नई के एविएशन सेक्टर और कार्गो ट्रैफिक की जरूरतों को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री ने दोतरफा रणनीति की घोषणा की है। सरकार चेन्नई के पास ही एक नई दूसरी जगह पर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण करेगी। इसके लिए तकनीकी व्यवहार्यता अध्ययन शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि ऐसी जगह चुनी जाए जहां आबादी और खेती को कम से कम नुकसान हो सके। साथ ही जब तक नया ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नहीं बनता, तब तक मौजूदा चेन्नई इंटरनेशनल एयरपोर्ट की क्षमता को और बढ़ा दी जाएगी। इसके तहत एयरपोर्ट के उत्तर-पश्चिम हिस्से में एक अत्याधुनिक टर्मिनल 5 (T5) और नई अप्रोच रोड का भी निर्माण किया जाएगा। इस विस्तार से हवाई अड्डे की वार्षिक यात्री क्षमता 3.5 करोड़ से बढ़कर सीधे 5.5 करोड़ हो जाएगी।
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विपक्ष का पलटवार
आपको बता दें कि सरकार के इस फैसले पर राज्य में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मामले में मुख्य विपक्षी दल DMK के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है। साथ ही स्टालिन ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए इतने बड़े प्रोजेक्ट को रद करना तमिलनाडु के आर्थिक विकास और युवाओं के रोजगार के अवसरों के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा।