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पीपल बाबा की ‘पीपल की छांव में’ से पर्यावरण दिवस पर निकलेगा हरियाली का रास्ता

By Sushil Singh 
Updated Date

मुरादाबाद:- पीपल बाबा नाम सुकर कही आपको यह ख्याल तो नहीं आ रहा यह कोई पीपल पेड़ के नीचे बैठ कर कथा सुनाने वाले या पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर लोगों का भविष्य बताने वाले पीपल बाबा होंगे. यह वह पीपल बाबा ऊर्फ स्वामी प्रेम परिवर्तन जिन्होंने 50 साल में जमीनी स्तर पर करीब 2.70 लाख हेक्टेयर में ढाई करोड़ पेड़ और उतनी ही झाड़िया लगायी है. अपने इस अनुभव पर ‘पीपल की छाँव में’ एक किताब भी लिखी है. पीपल बाबा देश के कई हिस्सों में हरियाली लाने का काम कर रहे है.

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पेड़ लगाने के शौकीन और पीपल के पेड़ से प्यार करने वाले पीपल बाबा का कहना है कि पीपल के पेड़ ने उन्हें बचपन से ही आकर्षित कर रखा था. उन्होंने इस महत्त्वपूर्ण प्रजाति के पौधारोपण, संरक्षण और प्रचार-प्रसार में 48 वर्ष व्यतीत किए हैं. यह पुस्तक उस लंबे साथ को साझा करने का मेरा तरीका है, जो कड़वे-मीठे और पवित्र दोनों है. नानी की बदौलत उनका उत्तराखंड के जंगलों, कॉर्बेट, राजाजी, हरिद्वार, ऋषिकेश, नरेंद्र नगर, टिहरी, उत्तरकाशी, नैनीताल और अल्मोड़ा से परिचय हुआ. हमारे छोटे परिवार का तबादला हिमाचल प्रदेश के डलहौजी में हो गया. दशकों बाद भी, महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में भी, मैं दीवारों के अंदर नहीं रह सकता था. मैं पौधों को पानी देता, अपनी पीठ पर धूप महसूस करता, हवा से ऐसे बात करता जैसे वह मेरी कोई पुरानी दोस्त हो. प्रकृति ने हमें कैद में रहने के लिए नहीं बनाया. उसने खुला आसमान बनाया और उसे घर कहा. कैंब्रियन हॉल स्कूल मेरी पहली औपचारिक कक्षा बनी. उससे पहले, मैंने कोलकाता, डलहौजी और चंडीगढ़ में एक-एक साल पढ़ाई की थी.

पीपल बाबा ने सेना के साथ मिलकर मेरठ में 18—20 यूनिट में पौधे लगाए हैं. किचन गार्डन एसोसिएशन के साथ मिलकर साकेत और बाउंड्री रोड पर दो माइक्रो फॉरेस्ट बनाने के साथ ही कई स्कूलों में हरियाली का अभियान चलाया है. यूपी पर्यटन विभाग की तरफ से उन्हें हस्तिनापुर में भी पौधे लगाने का प्रस्ताव आया है, लेकिन वहां फिलहाल सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है. उसके बाद वह वहां पौधे लगाएंगे. गिव मी ट्रस्ट के वेस्ट यूपी और उत्तराखंड के प्रोजेक्ट मैनेजर जगदीश ठाकुर ने बताया कि मेरठ में पल्लवपुरम के पास उल्देपुर में वर्मी कंपोस्ड प्लांट है, जहां साढ़े तीन सौ बेड्स हैं और माह में 60—70 टन खाद का उत्पादन होता है. इतना ही नहीं वहां इस काम के जरिए 10 महिलाओं को रोजगार भी मिला हुआ है. पीपल बाबा के नेतृत्व में उन्होंने मोदीनगर फॉरेंसिक साइंस लैब निवाड़ी में 10 हजार पेड़ लगाए हैं. खतौली में जानसठ रोड पर उमर पुर लिसोड़ा गांव में सेंटर नर्सरी भी है.

सुशील कुमार सिंह

मुरादाबाद

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