बेंगलुरु। SIR के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान बेंगलुरु में पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बीते 12 अक्टूबर को प्रदर्शनकारी कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर मार्च करने का प्रयास कर रहे थे। तभी पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को धक्का दिया, उन्हें घसीटा और जबरन बसों में बैठाया। वहीं महिलाओं के साथ कथित बदसलूकी के आरोप भी सामने आए हैं।
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पत्रकारों से भी कथित मारपीट
कुछ फोटो पत्रकारों ने भी पुलिस पर मारपीट और कैमरा छीनने की कोशिश का आरोप लगाया। Deccan Herald के फोटो पत्रकार पुष्कर वी. और Times of India के फोटो पत्रकार सैयद आसिफ के साथ कथित तौर पर पुलिस ने धक्का-मुक्की की। आयोजकों के अनुसार, इनके अलावा कुछ अन्य पत्रकारों के साथ भी बदसलूकी हुई।
पुलिस ने क्या कहा?
बेंगलुरु के DCP अक्षय एम. हाके ने कहा कि प्रदर्शनकारी बिना अनुमति KR Circle के पास इकट्ठा हुए थे। पुलिस ने उन्हें फ्रीडम पार्क जैसे निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर जाने के लिए कहा। जब ऐसा नहीं हुआ तो उन्हें हिरासत में लिया गया और बाद में छोड़ दिया गया। पत्रकारों और पुलिस के बीच हुई कथित झड़प को उन्होंने “अनजाने में हुई घर्षण” बताया।
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आपको बता दें कि प्रदर्शनकारी SIR को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। इस घटना ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि, धक्का देने, घसीटने और पत्रकारों से मारपीट के आरोपों को यहां आरोप के रूप में ही रखा गया है। वहीं पुलिस ने जानबूझकर मारपीट से इनकार किया है और इसे तनावपूर्ण परिस्थितियों में हुई अनजानी झड़प बताया है।