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Pradyumna Chaturthi 2026 : प्रद्युम्न चतुर्थी कल, भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करने से रुके हुए कार्य पूर्ण होने लगते है

By अनूप कुमार 
Updated Date

Pradyumna Chaturthi 2026 :  सनातनधर्म में प्रथमपूज्य भगवान गणेश की पूजा विधि विधान से की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जाता है। यह पर्व भगवान गणेश को समर्पित है। पौराणिक मान्यता है कि भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करने से रुके हुए कार्य पूर्ण होने लगते है।विनायक चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को वर्जित माना गया है

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष दिन भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और रुके हुए कार्य पूर्ण होने लगते हैं.

प्रद्युम्न चतुर्थी शुभ मुहूर्त 2026
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 17 जून 2026, रात 09:38 बजे से
चतुर्थी तिथि समाप्त: 18 जून 2026, शाम 06:58 बजे तक
पूजा का मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 10:58 बजे से दोपहर 01:46 बजे तक
प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन क्या न करें?
चंद्र दर्शन करने से बचें

तुलसी दल न चढ़ाएं
भगवान गणेश की पूजा में तुलसी दल अर्पित करना वर्जित माना गया है। इस गणेश भगवान की पूजा में दुर्वा अर्पित करना चाहिए। दूर्वा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका गणपति जी से गहरा आध्यात्मिक और पौराणिक संबंध भी है।आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, दूर्वा में श्री गणेश के पवित्र आध्यात्मिक कणों (पवित्रकों) को आकर्षित करने की क्षमता सबसे अधिक होती है। इसे मूर्ति पर चढ़ाने से मूर्ति ‘जागृत’ होती है और वातावरण में चैतन्य फैलता है।

तामसिक भोजन और विवाद से दूर रहें
इस दिन घर में सात्विक वातावरण बनाए रखना चाहिए।

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पशु-पक्षियों को न सताएं
भगवान गणेश का वाहन मूषक (चूहा) है और वे गजमुख स्वरूप में पूजे जाते हैं। इसलिए इस दिन किसी भी पशु-पक्षी या बेजुबान जीव को कष्ट न पहुंचाएं। विशेष रूप से चूहों को नुकसान पहुंचाने से बचें।

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