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राहुल गांधी ने श्रमिकों का किया समर्थन, बोले-तनख्वाह बढ़ने तक ये बेलगाम महंगाई ज़िंदगी का गला घोंट देती है, यही है विकसित भारत का सच

By संतोष सिंह 
Updated Date

लखनऊ। यूपी के गौतमबुद्धनगर जिले में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर कर्मचारियों के हिंसक प्रदर्शन पर मंगलवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi)  ने प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने इसे श्रमिकों पर अत्याचार बताया। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आखिरी चीख थी, जिसकी हर आवाज को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया।

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उन्होंने लिखा कि सोमवार को नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आख़िरी चीख़ थी, जिसकी हर आवाज़ को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया। नोएडा में काम करने वाले एक मज़दूर की 12,000 रुपये महीने की तनख्वाह,4,000-7,000 रुपये किराया। जब तक 300 रुपये की सालाना बढ़ोतरी मिलती है, मकान मालिक 500 रुपये सालाना किराया बढ़ा देता है।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi)  ने कहा कि तनख्वाह बढ़ने तक ये बेलगाम महंगाई ज़िंदगी का गला घोंट देती है, कर्ज़ की गहराई में डुबा देती है कि यही है “विकसित भारत” का सच। एक महिला मज़दूर ने कहा कि गैस के दाम बढ़ते हैं, पर हमारी तनख्वाह नहीं। इन लोगों ने शायद इस गैस संकट के दौरान अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए 5000 रुपया का भी सिलेंडर खरीदा होगा।

उन्होंने लिखा कि यह सिर्फ़ नोएडा की बात नहीं है। और यह सिर्फ़ भारत की भी बात नहीं है। दुनियाभर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं । पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से सप्लाई चेन टूट गई है। उन्होंने कहा कि मगर, अमेरिका के टैरिफ़ वॉर, वैश्विक महंगाई, टूटती सप्लाई चेन – इसका बोझ Modi जी के “मित्र” उद्योगपतियों पर नहीं पड़ा। इसकी सबसे बड़ी मार पड़ी है उस मज़दूर पर जो दिहाड़ी कमाता है, तभी रोज़ खाता है।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi)  ने कहा किवो मज़दूर, जो किसी युद्ध का हिस्सा नहीं, जिसने कोई नीति नहीं बनाई, जिसने बस काम किया। चुपचाप। बिना शिकायत। और उसके बदले अपना हक मांगने पर उन्हें मिलता क्या है? दबाव और अत्याचार। एक और ज़रूरी मुद्दा, मोदी सरकार ने 4 लेबर कोड जल्दबाज़ी में बिना संवाद नवंबर, 2025 से लागू कर, काम का समय 12 घंटे तक बढ़ा दिया।

उन्होंने लिखा कि जो मज़दूर हर रोज़ 12-12 घंटे खड़े होकर काम करता है फिर भी बच्चों की स्कूल फ़ीस क़र्ज़ लेकर भरता है – क्या उसकी मांग ग़ैरवाजिब है? और जो उसका हक़ हर रोज़ मार रहा है – वो “विकास” कर रहा है? नोएडा का मज़दूर 20,000 रुपया मांग रहा है। यह कोई लालच नहीं, यह उसका अधिकार, उसकी जिंदगी का एकमात्र आधार है। उन्होंने कहा कि मैं हर उस मज़दूर के साथ हूं, जो इस देश की रीढ़ है और जिसे इस सरकार ने बोझ समझ लिया है।

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