Bharat Bandh 12 Feb 2026 : देशभर के किसान और ट्रेड यूनियंस ने आज भारत बंद का ऐलान किया है। ये विरोध भारत-US अंतरिम ट्रेड डील, केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों, G RAM G बिल और नए श्रम कानूनों को लेकर है। इस हड़ताल में देश के बड़े किसान और कई केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने शामिल हैं। वहीं, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 12 फरवरी के भारत बंद का खुलकर समर्थन किया है।
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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को कहा कि वह मजदूरों और किसानों के मुद्दों और उनके संघर्ष के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, ” आज देशभर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक़ की आवाज़ बुलंद करने सड़कों पर हैं। मजदूरों को डर है कि चार श्रम संहिताएँ उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगी। किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौता उनकी आजीविका पर चोट करेगा। और मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से गांवों का आख़िरी सहारा भी छिन सकता है। जब उनके भविष्य से जुड़े फैसले लिए गए, उनकी आवाज़ को नज़रअंदाज़ किया गया। क्या मोदीजी अब सुनेंगे? या उन पर किसी “grip” की पकड़ बहुत मज़बूत है? मैं मजदूरों और किसानों के मुद्दों और उनके संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ा हूँ।”
आज देशभर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक़ की आवाज़ बुलंद करने सड़कों पर हैं।
मजदूरों को डर है कि चार श्रम संहिताएँ उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगी।
किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौता उनकी आजीविका पर चोट करेगा।
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और मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से गांवों का आख़िरी सहारा भी…
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 12, 2026
भारत बंद में कौन-कौन शामिल
जानकारी के अनुसार, भारत बंद 10 सेंट्रल ट्रेड यूनियनों के जॉइंट प्लेटफॉर्म ने बुलाई है, जिसमें एआईटीयूसी (AITUC), आईएनटीयूसी (INTUC), सीआईटीयू (CITU), एचएमएस (HMS), टीयूसीसी (TUCC), एसईडबल्यूए (SEWA), एआईयूटीयूसी (AIUTUC), एआईसीसीटीयू (AICCTU), एलपीएफ़ (LPF), और यूटीयूसी (UTUC) शामिल हैं। इसके अलावा, संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), कृषि मजदूर संगठन, छात्र और युवा संगठन भी इस बंद का समर्थन कर रहे हैं।
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संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि कृषि मजदूर यूनियनों का मंच और एनआरईजीए संघर्ष मोर्चा (एनएसएम) भी देशभर में विरोध प्रदर्शनों में समर्थन और भागीदारी करेगा। उन्होंने लोगों से अपील करता है कि वह बीजेपी सरकार द्वारा किसानों, मजदूरों और आम जनता पर किए जा रहे सभी नए हमलों का विरोध करें।
संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को ‘आर्थिक उपनिवेशवाद’ का ब्लूप्रिंट करार दिया है। किसान संगठन का आरोप है कि इस डील के दबाव में मोदी सरकार ने धान पर दिए जाने वाले बोनस को वापस लेने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को कमजोर करने का मन बनाया है।
यूनियन लीडर का कहना है कि भारत बंद के जरिये का मज़बूत सोशल सिक्योरिटी उपायों और मज़दूरों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए सरकार पर दबाव बनाना है। वे चार नए लेबर कोड का विरोध कर रही हैं, उनका आरोप है कि नए लेबर कोड मज़दूरों के अधिकारों को कमज़ोर करते हैं, जॉब सिक्योरिटी को कम करते हैं, और मालिकों के लिए कर्मचारियों को काम पर रखना और निकालना आसान बनाते हैं।
किसान और ट्रेड यूनियंस की मांग
– न्यू लेबर कोड (लेबर कोड्स) को सरकार वापस ले।
– बिजली विधेयक-2025 और बीज विधेयक-2025 को सरकार वापस ले। स्मार्ट मीटर बंद किए जाएं और सभी को 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाए।
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– विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G एक्ट-2025 को रद्द करें।
– सरकार पुरानी पेंशन योजना बहाल करे।
– मजदूरों सहित योजना कार्यकर्ताओं के लिए न्यूनतम मजदूरी लागू करें।