नई दिल्ली। होर्मुज़ स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और विदेश मंत्री ‘अब्बास अराग़ची’ ने इस रणनीतिक जलमार्ग को लेकर सख्त बयान दिए हैं, जो डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद सामने आए हैं। रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने ईरान के पावर प्लांटों या ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया, तो ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को पूरी तरह बंद कर देगा।
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इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्सने कहा कि स्ट्रेट तब तक बंद रहेगा जब तक कि अमेरिका द्वारा नष्ट किए गए ईरानी पावर प्लांटों का पुनर्निर्माण नहीं हो जाता। IRGC ने संकेत दिया है कि अगर उनके पावर प्लांट पर हमला हुआ, तो खाड़ी देशों में अमेरिका से जुड़े ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और पानी के बुनियादी ढांचे पर भी हमला किया जा सकता है।
अब्बास अराग़ची का बयान
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची (Iran’s Deputy Foreign Minister Abbas Araqchi) ने जोर देकर कहा है कि होर्मुज़ स्ट्रेट “खुला” है, लेकिन यह ईरान के दुश्मनों (अमेरिका और इज़राइल) के जहाजों के लिए बंद है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि स्ट्रेट बंद नहीं है, लेकिन बीमा कंपनियों के डर के कारण जहाजों की आवाजाही कम है। उन्होंने कहा,कि दुश्मन के लिए यह बंद रहेगा, जो हम पर हमला कर रहे हैं। अराग़ची ने तनाव के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यह “पसंद का युद्ध” है, जिसे अमेरिका ने शुरू किया है।
डोनाल्ड ट्रम्प ने 21 मार्च को चेतावनी दी थी कि अगर 48 घंटे में होर्मुज़ स्ट्रेट को पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांटों को नष्ट कर देगा। इस पर ईरान ने यह पलटवार किया है, जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई (जो इस रास्ते से 20 फीसदी आती है) पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
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रिपोर्ट: सुशील कुमार साह