नई दिल्ली। अब बहुत जल्द आप नमक से अपना इलेक्ट्रिक स्कूटर (Electric Scooter) चला पायेंगे। जी हां दोस्तों है ना हैरान करने वाली बात। ये बात एकदम सोलह आना सच्च है। बहुत जल्द आप नमक की बनी बैटरी से इलेक्ट्रिक स्कूटर (Electric Scooter) चलने को तैयार हो जायें। चीन ने एक ऐसी टेक्नोलॉजी बनाई है। जिससे समुद्री नमक से इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) को पावर देने वाली बैटरी तैयार की जा रही हैं।
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अब तक इलेक्ट्रिक गाड़ियों (Electric Vehicles) को चलाने के लिए लिथियम आयन (Li-ion), लिथियम फॉस्फेट (LFP) या लेड एसिड (Lead Acid) से बनी बैटरियों का इस्तेमाल होता है। एक ओर बैटरियों के लिए लिथियम का खनन करना काफी महंगा है, तो दूसरी ओर यह पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचा रहा है। लेकिन अब नमक से इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) को दौड़ाने की व्यवस्था बनाई जा रही है।
दरअसल, चीन बड़ी संख्या में ऐसी इलेक्ट्रिक स्कूटरों (Electric Scooter) की टेस्टिंग कर रहा है जिनकी बैटरियों को समुद्र के पानी से निकाने जाने वाले नमक से तैयार किया गया है। इस इलेक्ट्रिक स्कूटरों में सोडियम सॉल्ट (Sodium Salt) से बनी बैटरियों का इस्तेमाल किया गया है जिनकी कीमत तकरीबन 30-51 हजार रुपये के बीच है। यानी इनकी कीमत पेट्रोल और मौजूदी ईवी स्कूटरों (EV Scooters)से भी कम है। फिलहाल ये चीन की देन है। चीनी स्कूटर।
15 मिनट में चार्ज हो जाएगा स्कूटर
सोडियम सॉल्ट (Sodium Salt) से बनी बैटरियों की सबसे खास बात ये है कि इन्हें 0 से 80% तक चार्ज होने में केवल 15 मिनट लगते हैं। चीन में जनवरी 2025 में सोडियम से चलने वाले कई इलेक्ट्रिक स्कूटर (Electric Scooter) लॉन्च किए गए थे, जिन्हें चलाकर लोग टेस्ट भी कर रहे हैं। सोडियम बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक स्कूटरों के लिए बैटरी स्वैपिंग स्टेशन भी तैयार किए जा रहे हैं, ताकि स्वैप कर चार्जिंग के समय से बचा जा सके।
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ये टेक्नोलॉजी बन सकती है गेम चेंजर
ईवी इंडस्ट्री (EV Industry) में चीन की सोडियम बैटरी टेक्नोलॉजी गेम चेंजर साबित हो सकती है। यह लिथियम बैटरी (Lithium Batteries) का किफायती और टिकाऊ समाधान प्रदान कर सकता है। लिथिम का खनन जहां पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, वहीं सोडियम बैटरियों को तैयार करने के लिए नमक समुद्रों में भर पड़ा है। यह लिथियम बैटरियों (Lithium Batteries) का ईको-फ्रेंडली (Eco-Friendly) समाधान भी है।
जानें भारत में कब आएंगे ऐसे स्कूटर?
भारत में फिलहाल इस तरह की टेक्नोलॉजी पर काम नहीं चल रहा है, लेकिन आने वाले समय में इन बैटरियों पर भी रिसर्च और डेवलपमेंट शुरू हो सकता है। उम्मीद है कि यदि इस तरह की टेक्नोलॉजी देश में ही विकसित कर ली गई तो बैटरियों को बनाना सस्ता हो जाएगा, जिससे इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कीमत कम होगी और इसका अंतिम फायदा आम जनता तक किफायती इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) के रूप में पहुंचेगा।