Ram Mandir Trust controversy : अयोध्या राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितता मामले में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज (Shankaracharya of Jyotishpeeth, Swami Avimukteshwaranand Saraswati Maharaj) ने सनसनीखेज खुलासा किया है। बता दें कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज (Trust Treasurer Govind Dev Giri Maharaj) ने बीते सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जो बयान दिया है। उसी को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट को लेकर जो समाचार आया है वह बहुत ही चौंका देने वाला है। इस ट्रस्ट में जितने भी ट्रस्टी बनाए गए हैं उन्हें कोई अधिकार नहीं दिए गए थे।
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ट्रस्ट की पहली बैठक में ही स्वामी महंत नृत्यगोपाल दास जी महाराज से छीन लिया गया था हस्ताक्षर करने का अधिकार : शंकराचार्य
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज (Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati Maharaj) ने कहा कि हमने पहले ही कहा था कि पराशरन जी के घर में ट्रस्ट की जो पहली बैठक हुई थी उसी बैठक में जो इस ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। स्वामी ने कहा कि महंत नृत्यगोपाल दास जी महाराज (Mahant Nritya Gopal Das Ji Maharaj) हैं, उनसे उनके हस्ताक्षर करने का अधिकार ट्रस्ट की पहली बैठक में ही छीन लिया गया था। साथ ही यह कहा गया था कि यह हस्ताक्षर उनका जो कोई विश्वस्त व्यक्ति है, चंपत राय या जो? … अनिल मिश्रा को यह अधिकार दे दिया गया था। यानी ट्रस्ट में जो साधु-संत शामिल किए गए थे वह मात्र दिखावा था। वास्तव में उनको कोई अधिकार नहीं दिया गया था।
जो एक-दो लोग आपके विश्वस्त इस ट्रस्ट को चलते थे, इसलिए नरेंद्र मोदी जी आप अपनी जिम्मेदारियों से नहीं बच सकते
उन्होंने आगे कहा कि हमने सोचा चलो दूसरे एक संत हैं कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज (Trust Treasurer Govind Dev Giri Maharaj) , फिर अब उन्होंने भी यह कल रहस्योदघाटन कर दिया है कि उनके पास कोषाध्यक्ष के रूप में हस्ताक्षर करने का कोई अधिकार नहीं था। न वह किसी चेक बुक पर हस्ताक्षर कर सकते थे न और कहीं। शंकराचार्य ने सवाल उठाया कि जब अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष,ट्रस्ट के दोनों पदाधिकारियों के अधिकार अपने खास लोगों को ही दे दिए गए थे। यानी ट्रस्ट में जो साधु संत पदाधिकारी बनाए गए थे वह मात्र एक दिखावा थे। वास्तव एक-दो लोग जो आपके विश्वस्त थे, वही इस ट्रस्ट को चलते थे। इसलिए नरेंद्र मोदी जी आप अपनी जिम्मेदारियों से नहीं बच सकते।
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जब राम भक्तों पर गोली चली तो उसके जिम्मेदार मुलायम सिंह यादव , जब राम मंदिर ट्रस्ट में चोरी के लिए सीएम योगी क्यों नहीं ?
धर्मस्थान को स्वार्थ के लिए प्रयोग किया आप लोगों ने।
ट्रस्ट में डाले गए साधु-संत केवल दिखावा थे,
वास्तव में उनको भी कोई अधिकार नहीं दिये गये थे।
सारे अधिकार अपने विश्वस्तों को दिये गये थे।**जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज जी..! pic.twitter.com/oLXbcDvD43
— Hem Raaj Verma (@hemrajvermapbt) July 7, 2026
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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati )ने राज्य और केंद्र सरकार को भी मामले में घेरते हुए कहा कि जब डबल इंजन की सरकार है और आपकी नाक के नीचे यह सब हो रहा है तो उसकी जवाब देही से न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बच सकते और न ही आपके के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बच सकते हैं। क्योंकि उन्हीं के प्रदेश में उन्हीं के नाक के नीचे चोरी हो रही थी। जब यूपी में राम भक्तों पर गोली चली तो उसके जिम्मेदार तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे। जब राम मंदिर ट्रस्ट में चोरी हुई तो उसके जिम्मेदार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ क्यों नहीं हो सकते?
कोषाध्यक्ष गोविंद देव ने कहा कि पिछले महीने ही मुझे मंदिर के एकाउंट के बारे में जानकारी दी गई है जोकि बड़ा ही चिंताजनक है
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati ) ने कहा कि गोविंद देव जी द्वारा यह बड़ा रहस्योदघाटन करना कि कोषाध्यक्ष रहते हुए भी उन्हें कोष की जानकारी नहीं थी। गोविंद देव ने कहा कि पिछले महीने ही मुझे मंदिर के एकाउंट के बारे में जानकारी दी गई है जोकि बड़ा ही चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि अगर संतों को वास्तव में ट्रस्ट की व्यवस्था में प्रभावी भूमिका दी जाती तो ऐसी परिस्थितियां पैदा नहीं होतीं। उनके बयान के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की पारदर्शिता, प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बयान ने इस पूरे विवाद को धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी संवेदनशील बना दिया
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand) के बयान ने इस पूरे विवाद को धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी संवेदनशील बना दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि राम मंदिर जैसी आस्था के केंद्र की व्यवस्था में केवल नाम के लिए संतों को शामिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति भी मिलनी चाहिए। राम मंदिर निर्माण और प्रबंधन करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में भक्तों ने दान दिया है। ऐसे में चढ़ावे और आर्थिक संसाधनों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों ने ट्रस्ट पर दबाव बढ़ा दिया है। वहीं,एसआईटी जांच के बाद अब निगाहें आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच एजेंसी द्वारा आरोपियों की भूमिका,वित्तीय लेन-देन और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की पड़ताल जारी है। इस मामले में जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आएंगे, मंदिर प्रबंधन की व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।