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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यौन शोषण के आरोपों को बताया साजिश का हिस्सा, बोले-‘मैं योगी नहीं हूं जो केस हटवा लूं…’, कह दी ये बड़ी बात

By संतोष सिंह 
Updated Date

वाराणसी । ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Shankaracharya Swami Avimukteshwarananda Saraswati of Jyotish Peeth) से जुड़े यौन शोषण आरोप मामले (Allegations of Sexual Abuse) में प्रयागराज एडीजे रेप एवं पॉक्सो स्पेशल कोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने झूंसी थाना पुलिस को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Swami Avimukteshwarananda Saraswati) और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी (Disciple Swami Mukundanand Giri) के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विधिवत जांच करने को कहा है। वहीं दूसरी ओर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘हम योगी आदित्यनाथ नहीं हैं जो अपने ऊपर लगे आरोप हटवा लें।

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आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद Swami Avimukteshwarananda) ने कहा कि उनके खिलाफ लगाया गया मुकदमा पूरी तरह झूठा है और सच जल्द सामने आएगा। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता स्वयं हिस्ट्रीशीटर है और उसका नाम कई मामलों में दर्ज है। स्वामी का यह भी कहना है कि उन पर लगाया गया आरोप किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि राम भद्राचार्य (Ram Bhadracharya) के एक शिष्य द्वारा लगाया गया है।

पुलिस जांच पर जताया संदेह

उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि मामले को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए और शीघ्र कार्रवाई की जाए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी कहा कि वे आरोपों का डटकर सामना करेंगे। साथ ही उन्होंने पुलिस जांच पर पूर्ण भरोसा न जताते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। स्वामी ने कहा कि वे जांच एजेंसियों को हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार हैं।

एडीजे पॉक्सो कोर्ट का निर्देश

एडीजे पॉक्सो एक्ट के न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया (Adj POCSO Act Judge Vinod Kumar Chaurasia) ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि दोनों आरोपियों के खिलाफ विधिक रूप से मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए। अदालत के निर्देश के बाद झूंसी थाना पुलिस अब एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगी। माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की कानूनी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

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धारा 173(4) के तहत दी गई थी अर्जी

शाकुंभरी पीठाधीश्वर एवं श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट (Shakumbhari Peethadhishwar and Shri Krishna Janmabhoomi Mukti Nirman Trust) से जुड़े आशुतोष ब्रह्मचारी ने 28 जनवरी को धारा 173(4) के तहत अदालत में आवेदन देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। उनका आरोप है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Swami Avimukteshwarananda Saraswati) के आश्रम में नाबालिग बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) की घटनाएं होती हैं। उन्होंने इस संबंध में एक सीडी अदालत को सौंपने का दावा भी किया है।

नाबालिगों के बयान दर्ज

इस मामले में 13 फरवरी को आरोप लगाने वाले दोनों नाबालिगों के बयान अदालत में वीडियोग्राफी के साथ दर्ज किए गए थे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस की रिपोर्ट को भी संज्ञान में लिया और निर्णय सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया है।

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