Somvati Amavasya 2026 : धर्म ग्रंथों में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस तिथि के स्वामी पितृगण हैं, इसलिए इस दिन पितरों की शांति के लिए विशेष पूजा, श्राद्ध, तर्पण आदि करने की परंपरा है। ऐसा संयोग साल में 2 या 3 बार ही बनता है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान कर जरूरतमंदों को दान करने का विशेष महत्व है।
पढ़ें :- Assam Bioethanol Plant : असम में दूसरी पीढ़ी का बायोएथेनॉल प्लांट , ऐसे होता है बांस का इस्तेमाल
पंचांग के अनुसार साल 2206 में पहली सोमवती अमावस्या का संयोग 15 जून को बन रहा है। इस दिन ज्येष्ठ के अधिक मास की अमावस्या तिथि रहेगी। अधिक मास 3 साल में एक बार आता है, इसलिए इस महीने में सोमवती अमावस्या का संयोग बहुत ही शुभ माना जा रहा है।
इस दिन सूर्य बदलेगा राशि
15 जून, सोमवार को ही सूर्य वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेगा। इसलिए इस दिन मिथुन संक्रांति का पर्व भी मनाया जाएगा। धर्म ग्रंथों में संक्रांति को भी विशेष पर्व माना गया है।
विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा और दान-पुण्य का अत्यंत महत्व है।
दान-पुण्य: इस दिन वस्त्र, अन्न, और सफेद वस्तुओं का दान करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
स्नान और मौन: पवित्र नदी (गंगा, यमुना) में स्नान करने से हजारों गोदान का पुण्य मिलता है।