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आगरा में नकली दवाओं के मामले में करोड़ों की जब्ती और फर्जी बिलिंग नेटवर्क का भंडाफोड़

By Sushil Sah 
Updated Date

उत्तर प्रदेश। आगरा में दवा सिंडिकेट ने नकली दवाएं खपाने के लिए अपने सगे संबंधियों के नाम पर ढ़ेर सारी फर्में खोलीं और इन्हीं फर्मों के नाम पर बिल भी बनाए। इसके अलावा तीन से चार फर्मों के नाम पर बिलों को डायवर्ट किया गया और उसके बाद बाजार में करोड़ों की नकली दवाएं बेच दी गई। इसके बाद इन सभी नकली फर्मों पर छापेमारी हुई। इन छापेमारी में नकली दवा पकड़े जाने के बाद अभी तक इस सिडिंकेट से जुड़े लोग जांच के दायरे में नहीं आए है। औषधि विभाग ने आठ महीने तक बिलों की जांच करने के बाद इसकी हेराफेरी का खेल पकड़ा।

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आपको बता दे कि औषधि विभाग की टीम ने चोट, दर्द और सूजन के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं के नकली होने की शंका होने पर पिछले वर्ष सात नवंबर को मनोज गुप्ता की फर्म की जांच की थी। यहां से भारी मात्रा में दवा कोलकाता के पाल ब्रदर्स को बेची गई थी। जांच के दौरान मनोज गुप्ता की फर्म ‘अंशिका फार्मा’ ने दवाएं विभोर मेडिकल एजेंसी से खरीदने के बिल दिखाए, जब विभोर मेडिकल एजेंसी की जांच हुई तो उसने गुप्ता मेडिकल एजेंसी गोरखपुर और हर्षित ट्रेडर्स ने आगरा से दवाएं खरीदने के बिल दिखाए। लेकिन हैरत की बात यह है कि ये सभी बिल फर्जी थे। इसी बीच वरदान मेडिकल एजेंसी से जांच के लिए भेजे गए चाइमोरल फोर्ट के नमूने कम गुणवत्ता वाले मिले। इसके अलावा एसिलोक टैबलेट भी नकली पाई गई। जब इस बारे में पुछताछ हुई तो वरदान मेडिकल एजेंसी ने इन दवाओं को विभोर मेडिकल एजेंसी से खरीदने का दावा किया। वहीं टोरंट फार्मास्यूटिकल्स कंपनी जो चाइमोरल फोर्ट दवा बनाती है, उसने इन दवाओं को बाजार में सप्लाई ना करने की बात कही।

Assistant Drugs Commissioner ‘अतुल उपाध्याय’ के अनुसार, जांच के दौरान वरदान मेडिकल एजेंसी, विभोर मेडिकल एजेंसी, हर्षित ट्रेडर्स, वीए एंटरप्राइजेज, युग फार्मा, रुद्रा एंटरप्राइजेज, शारदा फार्मा और आरएमडी फार्मा द्वारा फार्मा कंपनी से चाइमोरल फोर्ट और मधुमेह की दवा टेल्मा एच दवा के 10 डिब्बे खरीदे, इसी बैच के एक हजार नकली दवाओं के डिब्बे तैयार कराए गए। आपको बता दे कि इन पांच फर्मों से बीस-बीस डिब्बों के बिल अपने रिश्तेदारों की फर्म के नाम से काटे गए। इसके बाद इन दवाओं को थोक दवा और मेडिकल स्टोर पर बेचने के साथ-साथ कोलकाता, दिल्ली, हरियाणा, इंदौर में भी दवाओं की बिक्री की गई।

थोक दवाओं के तीन हजार लाइसेंस

जांच में पता चला कि थोक दवाओं के तीन हजार लाइसेंस हैं। औषधि विभाग की टीम ने इन थोक दवाओं का ब्योरा शपथ पत्र के साथ मांगा है। साथ ही औषधि विभाग की टीम अपने स्तर से भी ब्योरा जुटा रही है जिससे इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सके। इन सभी धांधलियों के पीछे दवा एसोसिएशन के पदाधिकारी और औषधि निरीक्षकों की मिलीभगत की भी शिकायत मिली है। इनकी भी जांच की जा रही है। नकली दवा कारोबारियों के पास करोड़ों की संपत्ति है, कमला नगर सहित पॉश कालोनियों में मकान हैं। इन लोगों ने रियल एस्टेट में भी निवेश किया गया है। आपको बता दें कि फव्वारा दवा बाजार में छापेमारी के बाद 40 प्रतिशत दुकानें फिलहाल बंद हैं। दवा बाजार में भी खलबली मची हुई है। बीते 10 जुलाई की छापेमारी में मोहन ट्रेडर्स, कंबूटोला, मनी मेडिकल मुबारक महल को सील कर दिया था। अब इन दुकानों को खोलकर टीम जांच करेगी क्योंकि इसमें भी बड़ा नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।

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