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Sugar Price Hike : एक महीने पहले 45 रुपये बिक रही चीनी की कीमत 65 रुपये किलो तक पहुंची, अब मिठास हो रही कड़वी

By santosh singh 
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नई दिल्ली। देश में चीनी के दाम रिकार्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। यूपी की एम-ग्रेड चीनी का एक्स-फैक्ट्री दाम मंगलवार को 5,400 रुपए प्रति कुंतल पर पहुंच गया। इस पर पांच फीसदी जीएसटी (GST) लागू होता है। कीमतों में यह तेजी आने वाले दिनों में भी बरकरार रह सकती है। चीनी की बढ़त कीमतों ने केंद्र सरकार (Central Government)  की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खुदरा बाजार (Retail Market) में ग्राहकों को जो चीनी एक माह पहले 45 रुपए किलो मिल रही थी, वह अब 65 रुपए के उच्च स्तर तक पहुंच गई है। उत्पादन कमी के बावजूद चीनी के निर्यात और इथेनाल उत्पादन (Ethanol Production) के चलते चालू सीजन के अंत में चीनी व स्टाक घटकर रिकार्ड निचले स्तर पर पहुंचने का अनुमान है।

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इसका असर घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों पर साफ दिख रहा है। महाराष्ट्र में चीनी के एक्स फैक्ट्री दाम लगभग 5,300 रुपए प्रति कुंतल तक पहुंच गए हैं। जीएसटी (GST) जोड़ने के बाद इसक भाव 5,550-5,600 रुपए प्रति कुंतल तक पहुंच रहा है। चीनी की एक्स-फैक्ट्री कीमतों में बढ़ोतरी का असर थोक कीमतों पर भी दिखने लगा है। दिल्ली में चीनी का थोक भाव लगभग 5,800 रुपए प्रति कुंतल तक पहुंच गया है। इन बढ़ी हुई कीमतों का असर जल्द ही खुदरा बाजार पर भी दिखाई देगा, जहां कीमतें पहले ही 62-65 रुपए प्रति किलो के स्तर तक पहुंच गई हैं।

केंद्रीय उपभोक्ता मामले के विभाग के आंकड़ों में मूल्य 51.68 रुपये हैं

आने वाले दिनों में त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की कीमतों में और बढ़ोतरी सरकार की परेशानी बढ़ा सकती है। लेकिन जमीनी हकीकत और सरकारी आंकड़ों में कितना विरोधाभास है, यह कीमतों का अंतर साबित करता है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग की दर निगरानी डिविजन के आंकड़ों के मुताबिक, चीनी का औसत दैनिक खुदरा मूल्य अभी 51.68 रुपए प्रति किलो ही है। पिछले दो महीनों में चीनी की थोक कीमतें 4,400 रुपए प्रति कुंतल से बढ़कर 5,800 रुपए प्रति कुंतल तक पहुंच गई हैं।

इस तरह थोक कीमतों में करीब 32 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जो हाल के वर्षों में अप्रत्याशित उछाल है। चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का यह सिलसिला जारी रहा तो उपलब्धता बढ़ाने के लिए चीनी के आयात की नौबत भी आ सकती है। फिलहाल केंद्र सरकार ने चीनी के आयात पर 100 फीसदी सीमा शुल्क लगा रखा है। चीनी उद्योग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि उत्पादन सीजन के शुरुआती आंकड़ों व वास्तविक उत्पादन के बीच भारी अंतर के चलते कीमतों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है और यह बढ़ोतरी जारी रह सकती है। दूसरी तरफ जब त्योहारी सीजन सिर पर है और चीनी के दामों में तेजी बरकरार रहने के आसार हैं, सरकार के लिए परेशानी खड़ी होना तय है। अगर सरकार को इस चुनौती का सामना करने के लिए चीनी के शुल्क-मुक्त आयात का विकल्प अपनाना पड़ा तो इसका घरेलू उद्योग और गन्ना किसानों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

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गौरतलब है कि घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी को देखते हुए केंद्र सरकार ने जमाखोरी और सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए एक अगस्त से 30 नवंबर तक देशभर में चीनी के भंडारण की सीमा तय की है। इससे पहले केंद्र सरकार ने चीनी मिलों के पास उपलब्ध भंडारण का भौतिक सत्यापन कराने का आदेश भी जारी किया था। लेकिन सरकार की ओर से चीनी की कीमतों को स्थिर रखने के लिए किए गए उपाय अब तक कोई सकारात्मक परिणाम नहीं दे पाए हैं।

जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार द्वारा प्रत्येक डीलर के लिए चीनी भंडारण की सीमा 4,000 कुंतल तय किए जाने के बाद ट्रेडर्स और बिचौलियों ने चीनी का भंडारण जमा करना शुरू कर दिया। इससे दाम कम होने के बजाय कीमतों में और तेजी आ रही है। दरअसल, चीनी व्यापार से जुड़े लोगों को संभावित तंग आपूर्ति का अंदाजा पहले से था।

हैरानी की बात यह है कि केंद्र सरकार के खाद्य मंत्रालय ने चीनी मिलों पर कीमतों में बढ़ोतरी के लिए सट्टेबाजी की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। चीनी निदेशालय द्वारा 14 अगस्त को चीनी मिलों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि कई चीनी मिलों के पास उनके द्वारा घोषित मात्रा से अधिक चीनी का स्टाक है। इसके साथ ही चीनी के सौदे होने के बाद मिलें उसकी आपूर्ति में देरी कर रही हैं, जिससे चीनी की कीमतों में सट्टेबाजी को बढ़ावा मिल रहा है। मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि स्टाक में विसंगति पाए जाने पर चीनी मिलों के खिलाफ आवश्यक वस्तु कानून के तहत शुगर कंट्रोल आर्डर, 2025 के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस बीच चीनी मिलों ने आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आगामी सीजन की पेराई जल्द शुरू करने की पेशकश की है। इसके एवज में चीनी मिलों ने जीएसटी में छूट जैसी कई रियायतें मांगी हैं। हालांकि, कई व्यावहारिक दिक्कतों के चलते चीनी मिलों के लिए समय से पहले पेराई शुरू करना आसान नहीं होगा। अनुमान है कि चालू सीजन के अंत में 30 सितंबर, 2026 को देश में चीनी का क्लोजिंग स्टाक 30-33 लाख टन के बीच रह सकता है, जो कई दशकों में सबसे कम क्लोजिंग स्टाक होगा। इससे 2026-27 सीजन के शुरुआती दो महीनों में आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।

इस बीच चीनी मिलों (Sugar Mills) ने आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आगामी सीजन की पेराई जल्द शुरू करने की पेशकश की है। इसके एवज में चीनी मिलों ने जीएसटी में छूट जैसी कई रियायतें मांगी हैं। हालांकि, कई व्यावहारिक दिक्कतों के चलते चीनी मिलों (Sugar Mills) के लिए समय से पहले पेराई शुरू करना आसान नहीं होगा। अनुमान है कि चालू सीजन के अंत में 30 सितंबर, 2026 को देश में चीनी का क्लोजिंग स्टाक 30-33 लाख टन के बीच रह सकता है, जो कई दशकों में सबसे कम क्लोजिंग स्टाक (Closing Stock) होगा। इससे 2026-27 सीजन के शुरुआती दो महीनों में आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।

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केंद्र सरकार (Central Government) ने 24 जुलाई को चीनी मिलों (Sugar Mills) में स्टाक के भौतिक सत्यापन का आदेश दिया था। यह प्रक्रिया 14 अगस्त तक पूरी की जानी थी। लेकिन चीनी मिलों (Sugar Mills) का भौतिक सत्यापन पूरा होने के बाद अभी तक केंद्र सरकार ने चीनी भंडारण (Sugar Storage) के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं। अगर सरकार चीनी भंडारण (Sugar Storage) का आधिकारिक आंकड़ा जारी कर देगी तो इससे बाजार में अटकलों पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।

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