नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मां को घर से निकालने वाले एक कलयुगी बेटे को कड़ी फटकार लगाते हुए आखिरी चेतावनी दी है। शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि अगर बेटे ने मां की ठीक से देखभाल नहीं की, तो संपत्ति की ‘गिफ्ट डीड’ (उपहार विलेख) को पूरी तरह रद कर दिया जाएगा।
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जस्टिस मनमोहन और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर बेटे की अपील को खारिज करते हुए कहा कि इसमें कोई दम नहीं है।
जॉइंट अकाउंट से उड़ाए 1.6 करोड़ रुपये
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नोट किया कि आरोपी बेटे ने न सिर्फ संपत्ति पर कब्जा किया बल्कि मां की सहमति के बिना उनके जॉइंट बैंक अकाउंट से ₹1.6 करोड़ भी निकाल लिए। अदालत ने बेटे के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा “अपना व्यवहार देखो। जायदाद मिलते ही तुमने मां को घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया और अब उन्हें साथ भी नहीं रखना चाहते।”
हाई कोर्ट ने पहले ही फेरा था फैसले पर पानी
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इससे पहले तेलंगाना हाई कोर्ट ने बेटे की करतूतों पर सख्त रुख अपनाते हुए गिफ्ट डीड को रद कर दिया था और संपत्ति दोबारा मां को सौंपने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि संपत्ति और फंड ट्रांसफर होते ही मां से रिश्ता तोड़ लेना, बेटे की असली नीयत को उजागर करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने अब बेटे को अपने रिश्ते सुधारने और मां से बातचीत के लिए मध्यस्थता का एक आखिरी मौका दिया है।