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राज्यपाल ने 42 साल पहले की सिकलसेल प्रभावितों की बताई करुण कहानी

By Shital Kumar 
Updated Date

इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समाज के हर वर्ग का सहयोग आवश्यक है। मध्यप्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बाद देश का तीसरा ऐसा राज्य है जहाँ सिकलसेल एनीमिया के सर्वाधिक प्रभावित मरीज़ हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता और शिक्षा के द्वारा इस बीमारी की रोकथाम संभव है। राज्यपाल श्री पटेल महात्मा गांधी स्मृति मेडिकल कॉलेज इंदौर में राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

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पहली बार सिकलसेल एनीमिया की त्रासदी को देखा था

राज्यपाल श्री पटेल ने अपने उद्बोधन में 42 साल पहले की पीड़ा और करुणा की कहानी बतायी। उन्होंने कहा कि जब वे गुजरात में कॉरपोरेटर थे, तब उन्होंने पहली बार सिकलसेल एनीमिया की त्रासदी को देखा था। पड़ोस के सिकल सेल एनीमिया से प्रभावित एक बच्चे को वे बम्बई में डॉ. ढोलकिया के पास में इलाज के लिए ले गए थे, किन्तु उस बच्चे को बचाया नहीं जा सका था। इसी तरह उन्होंने मार्मिक ढंग से बताया कि किस तरह पड़ोस की छोटी बच्ची जो उनके गोद में खेला करती थी, इसी बीमारी की वजह से महज़ 4 दिनों में मृत्यु को प्राप्त हो गई।

रोग उन्मूलन के लिए जनजागृति हो

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि हम सबकी जिम्मेदारी है कि हमारे परिवार, आस-पास और समुदाय में रोग उन्मूलन के लिए जनजागृति हो। इसके लिए जरुरी है कि रोग के जेनेटिक काउंसलिंग में समाज का हर व्यक्ति सहयोग करे। सिकल सेल रोग के उन्मूलन प्रयासों में योगदान करें। यह भी जरुरी है कि जेनेटिक कार्ड के मिलान के बाद ही विवाह करें, हर गर्भवती महिला, शिशु के स्वास्थ्य जांच के प्रति सोशल कॉन्शसनेस हो। समाज का समृद्ध वर्ग रोग उपचार और अनुसंधान प्रयासों में मदद के लिए आगे आए। जरुरतमंदों रोगियों को सामाजिक और भावनात्मक समर्थन प्रदान करें। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम सिकल सेल रोग को जड़ से मिटाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। हम ऐसे भारत का निर्माण करेंगे, जिसमें हर बच्चें को दर्द और पीड़ा से मुक्त स्वस्थ और खुशहाल जीवन का अधिकार प्राप्त हो।

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