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मतगणना वाले दिन से ही लालू परिवार में हुई थी बहस , हार के बाद हुआ विस्फोट

By Aakansha Upadhyay 
Updated Date

बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद लालू परिवार में तकरार जारी है । यह एक-दूसरे का किया-धरा ‘उकट’ देने के स्तर तक है। बात लालू के किडनी ट्रांसप्लांट, बदले में करोड़ों लेने, गाली व चप्पल तक नीचे गिर गई है। लालू यादव को अपनी किडनी देने वाली उनकी पुत्री रोहिणी आचार्य का दर्द एक्स हैंडल पर रविवार को भी कई बार छलका। वे आक्रोशित होने से कहीं अधिक आहत हैं। भारतीय परिवारों की शादीशुदा बेटी की तरह। उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए लिखा-‘किसी के घर में रोहिणी जैसी बेटी-बहन पैदा न हो…।’ मेरे अपमान पर मैं ही नहीं, मेरी मां (राबड़ी देवी), पिता (लालू प्रसाद यादव) भी रोये। सास ने सुना तो वह भी फफक पड़ीं।

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काउंटिंग के दिन ही हुई थी बहस

वहीं सूत्रों के हवाले पता चला है कि चुनाव परिणाम के बाद घर में काफी बहस हुई। मतगणना के दिन भी जब तेज प्रताप चुनाव हार गए थे, तो देर रात लालू बाहर निकले थे। अगले दिन शनिवार को घर का वातावरण काफी बोझिल हो गया था, जब रोहिणी प्रकरण हुआ। इन सबके बीच तेजस्वी बिल्कुल शांत हैं। बता दें कि लालू परिवार में ये मतभेद  नया नहीं है।मई 2018 में तेज प्रताप से शादी के कुछ माह बाद ही ऐश्वर्या राय रोते हुए ससुराल से निकली थीं, तब उनकी पीड़ा मीडिया के खबरों कि हेडलाइन बनी। सामाजिक स्तर पर सुलह व पंचायती के प्रयास निष्फल हुए तो बात कोर्ट तक पहुंच गई, जिसकी सुनवाई चल रही है। उसी घर से एक बेटी डबडबाई आंखें लिए घर से निकली है।वजह पार्टी की हार की जवाबदेही लेने की बाबत साफगोई से कही गईं बातों के बदले मिला अपमान है। कहा, मेरा मायका छुड़वा दिया गया। यह बात फिर समाज व लालू समर्थकों के सामने है। इस बीच रविवार दोपहर बाद लालू के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव ने कहा कि बहन रोहिणी के साथ अन्याय का नतीजा बहुत भयावह होगा।

पहले से चल रही खटपट

लालू परिवार में भाई-भाई के बाद भाई-बहन के बीच इस ताजा विवाद के कारण यह बात साफ हो गई है कि कुनबा एकजुट नहीं रह गया। तेज प्रताप के शब्दों में विवाद की जड़ में पार्टी के जयचंद हैं, जिन्हें वह विधानसभा चुनाव के पहले परिवार व पार्टी से स्वयं के निष्कासन की वजह बताते हैं।रोहिणी की पटकथा व किरदार भी कमोवेश वही हैं। लालू ने जब छोटे पुत्र तेजस्वी को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था तो तेज प्रताप ने स्वयं को कृष्ण और उन्हें अर्जुन कहकर पार्टी में अपनी भूमिका थिंक टैंक के तौर पर तय करने का प्रयास किया था। परंतु, ऐसा हो नहीं सका, तेजस्वी की ओर से ठंडी प्रतिक्रिया भी नहीं मिली।

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उन्होंने अपने पुराने मित्र संजय यादव को राज्यसभा सदस्य का रुतबा दिया और रणनीतिकार की तरह स्थापित कर दिया, जहां तेज प्रताप के लिए जगह नहीं थी। इस बीच तेज प्रताप के साथ इंटरनेट मीडिया पर प्रेमिका की फोटो प्रसारित हो गई, इन सबके बीच तेज प्रताप को पार्टी से निकाल दिया गया।

 

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