लखनऊ। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक पर समाजवादी पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल से की गई अमर्यादित टिप्पणी को लेकर सियासी उबाल मच गया है। भाजपा नेताओं ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को घेरना शुरू कर दिया है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए मांफी मांगने की बात कही गयी है।
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केशव मौर्य ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, समाजवादी पार्टी का चरित्र घटिया, घिनौना एवं समाज विरोधी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व की लोकप्रिय सरकार के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक जी को लेकर समाजवादी पार्टी के अधिकृत अकाउंट से ट्वीट किया गया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव तत्काल इसको वापस लेकर माफी मांगें अन्यथा पूरी समाजवादी पार्टी बहुत पछताएगी। इसकी सजा यूपी की जनता ‘सपा को समाप्त’ करके देगी।
समाजवादी पार्टी का चरित्र घटिया, घिनौना एवं समाज विरोधी है। उत्तर प्रदेश के मा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व की लोकप्रिय सरकार के उप मुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक जी को लेकर समाजवादी पार्टी के अधिकृत अकाउंट से ट्वीट किया गया है। सपा अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव तत्काल इसको…
— Keshav Prasad Maurya (@kpmaurya1) May 17, 2025
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वहीं, भाजपा नेता नीरज सिंह ने भी सपा पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, राजनीति में वैचारिक संघर्ष तो स्वाभाविक है, लेकिन अगर यह भाषा की मर्यादा को रौंदता हुआ निजी हमलों और अभद्रता तक पहुंच जाए, तो यह लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण संकेत है। आज समाजवादी पार्टी के आधिकारिक मीडिया सेल द्वारा प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक जी पर की गई अशोभनीय टिप्पणी केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे राजनीतिक विमर्श का अपमान है।
राजनीति में वैचारिक संघर्ष तो स्वाभाविक है, लेकिन अगर यह भाषा की मर्यादा को रौंदता हुआ निजी हमलों और अभद्रता तक पहुँच जाए, तो यह लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण संकेत है।
आज समाजवादी पार्टी के आधिकारिक मीडिया सेल द्वारा प्रदेश के उपमुख्यमंत्री आदरणीय श्री @brajeshpathakup जी पर…
— 𝐍𝐞𝐞𝐫𝐚𝐣 𝐒𝐢𝐧𝐠𝐡 (@NeerajSinghSays) May 17, 2025
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उन्होंने आगे लिखा, क्या धरतीपुत्र नेताजी की विरासत में अब भाषा की गरिमा की जगह तालियों से अभद्र भाषा एवं अशिष्टता का स्वागत होगा? क्या समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी इस स्तरहीन बयान से स्वयं को सहमत मानते हैं? यदि नहीं, तो क्या वे सार्वजनिक रूप से इसका खंडन और दोषियों पर कार्रवाई करेंगे? लोकतंत्र में असहमति का स्थान है, लेकिन अपमान का नहीं। सभी दलों को विचार करना चाहिए—क्या राजनीति अब संवाद से नहीं, बल्कि गालीबाज़ी से चलेगी?