नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्किार्जुन खरगे ने ट्रेड डील पर एक बार फिर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि, आज देश के सभी Trade Unions, किसान और मज़दूर-मोदी सरकार की Trade Deal, उनके लाए हुए Labour Laws और मनरेगा छीने जाने पर सड़कों पर हैं।
करोड़ों मेहनतकश किसानों, मज़दूरों और श्रमिकों का भविष्य गिरवी रखने वाली जन-विरोधी TRAP DEAL के खिलाफ़ हम डटकर खड़े हैं।
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उन्होंने आगे कहा, विदेशी दबाव में आकर, मोदी सरकार ने देश के करोड़ों नागरिकों के जीवन से खिलवाड़ किया है। “अबकी बार, ट्रंप सरकार” कहने वालों ने भारत के देशहित को चोट पहुंचाया है, जिसका सबसे बड़ा विरोध हमारे कामगार, छोटे व्यापारी और आम जनमानस कर रहे हैं। सड़क से संसद तक, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।
इसके साथ ही खरगे ने एक सोशल मीडिया एक्स पर एक अन्य पोस्ट लिखा है, जिसमें कहा, 21वीं सदी में जब हम बड़े-बड़े सामाजिक विकास और सामाजिक रिफार्म के दावे करते हैं। तब ओडिशा में एक दलित महिला हेल्पर/कुक के द्वारा बनाए गए भोजन को एक समुदाय विशेष के लोग अपने बच्चों को देने से मना कर देते हैं। पिछले तीन महीने से उस आंगनवाड़ी सेंटर का बहिष्कार किया जा रहा है। आंगनवाड़ी सेंटर देश में बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास की बुनियाद हैं, लेकिन ऐसे जातिगत भेदभाव का असर बच्चों के विकास पर पड़ेगा।
ये घटनाएं संविधान के आर्टिकल 21 (A) का हनन हैं। साथ ही, आर्टिकल 47 में निहित उस दायित्व के विपरीत भी हैं, जिनके अनुसार राज्य पर पोषण स्तर बढ़ाने और जनस्वास्थ्य सुधारने की जिम्मेदारी है। ऐसी घटनाओं को वर्कप्लेस पर होने वाले जातिगत भेदभाव के रूप में भी देखा जाएगा और हाल के वर्षों में ऐसी कई घटनाएं देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आईं हैं।
आज देश के सभी Trade Unions, किसान और मज़दूर — मोदी सरकार की Trade Deal, उनके लाए हुए Labour Laws और मनरेगा छीने जाने पर सड़कों पर हैं।
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करोड़ों मेहनतकश किसानों, मज़दूरों और श्रमिकों का भविष्य गिरवी रखने वाली जन-विरोधी TRAP DEAL के खिलाफ़ हम डटकर खड़े हैं।
विदेशी दबाव में आकर,… pic.twitter.com/wrPtSPm7RL
— Mallikarjun Kharge (@kharge) February 12, 2026
उन्होंने कहा, जैसे: मध्य प्रदेश में एक व्यक्ति द्वारा एक आदिवासी मजदूर पर पेशाब करने की अमानवीय घटना सामने आई थी। गुजरात में 28 साल के दलित सरकारी कर्मचारी ने जातिगत उत्पीड़न के चलते आत्महत्या कर ली थी। चंडीगढ़ में एक पुलिस अधिकारी की मृत्यु के बाद पुलिस बल के भीतर संस्थागत जातिगत भेदभाव के आरोप लगे थे।
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ये घटनाएं दिखाती हैं कि जातिगत भेदभाव केवल सामाजिक जीवन तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वर्कप्लेस पर भी है। किसी भी कर्मचारी के साथ जातिगत भेदभाव संविधान का उल्लंघन और दंडनीय अपराध है। मेरी मांग है कि ऐसे मामलों में समयबद्ध तरीके से सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, जहां पर इन मामलों में गंभीर उल्लंघन मिले, वहां जवाबदेही भी तय की जाए।