America-iran War: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच अमेरिका ने ईरान पर एक और बड़ा सैन्य हमला करने का दावा किया है। इस बार निशाने पर ईरान का रणनीतिक महत्व वाला चाबहार बंदरगाह रहा जहां भारत ने भी वर्षों से भारी निवेश किया है। अमेरिकी हमले के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। रिपोर्टों के मुताबिक शुक्रवार को चाबहार पोर्ट पर कम से कम तीन मिसाइलें दागी गईं। सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में बंदरगाह के आसपास धुएं के घने गुबार और धमाकों के बाद भारी नुकसान के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
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— Pete Hegseth (@PeteHegseth) July 17, 2026
निगरानी टॉवर ढहने का दावा, ईरान ने नहीं की आधिकारिक पुष्टि
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अमेरिकी पक्ष का दावा है कि हमले में बंदरगाह का एक निगरानी टॉवर पूरी तरह ध्वस्त हो गया। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी सोशल मीडिया पर हमले से जुड़ी तस्वीरें साझा की हैं। वायरल वीडियो में एक ऊंची संरचना गिरती हुई नजर आ रही है। दूसरी ओर, ईरानी मीडिया ने चाबहार क्षेत्र में लगातार तीसरे दौर के हमलों की पुष्टि तो की है, लेकिन निगरानी टॉवर गिराए जाने के दावे पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
लगातार छठी रात बरसे अमेरिकी बम
चाबहार पर हमले से पहले भी अमेरिका ईरान के अलग-अलग सैन्य ठिकानों पर लगातार हवाई हमले करता रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के उद्देश्य से लगातार छठी रात भी कई ठिकानों पर कार्रवाई की गई। ईरानी सरकारी मीडिया का कहना है कि ताजा हमलों में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई है, जबकि 20 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। वहीं ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से जारी जानकारी के अनुसार, 22 जून से दोबारा शुरू हुई इस जंग में अब तक 38 लोगों की जान जा चुकी है और 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है चाबहार पोर्ट?
चाबहार बंदरगाह ईरान के दक्षिण-पूर्वी सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है और भारत की रणनीतिक योजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान मध्य एशिया और आगे यूरोप तक व्यापारिक पहुंच उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाता है। इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) के लिए भी चाबहार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस परियोजना के जरिए भारत, ईरान और रूस समेत कई देशों के बीच व्यापार को तेज करने की योजना है।
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The Islamic Republic announced that the United States carried out a second strike on a maritime watchtower in the strategic port city of Chabahar within the past seven days, causing significant damage. pic.twitter.com/ZJCN5aAiSM
— Open Source Intel (@Osint613) July 15, 2026
मोदी सरकार ने किया था बड़ा निवेश
साल 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान यात्रा के दौरान भारत ईरान और अफगानिस्तान के बीच हुए समझौते के तहत चाबहार पोर्ट के विकास और संचालन के लिए भारत ने करीब 55 करोड़ डॉलर के निवेश की घोषणा की थी। इसके बाद से यह बंदरगाह भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय संपर्क रणनीति का प्रमुख हिस्सा बना हुआ है। चाबहार पर हुए ताजा हमले ने न सिर्फ पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को और गंभीर बना दिया है, बल्कि भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों को लेकर भी नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।