लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कार्यवाहक मुख्य सचिव दीपक कुमार ने इसको लेकर आदेश जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि, प्रदेश में अब सार्वजनिक स्थलों पर जाति का उल्लेख नहीं होगा। पुलिस रिकॉर्ड्स और प्राथमिकी से भी जाति का जिक्र हटाया जाएगा। सरकार के इस आदेश के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव का बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा कि, किसी पर झूठे और अपमानजनक आरोप लगाकर बदनाम करने के जातिगत भेदभाव से भरी साज़िशों को समाप्त करने के लिए क्या किया जाएगा?
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अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट लिखा है। उन्होंने कहा कि,…और 5000 सालों से मन में बसे जातिगत भेदभाव को दूर करने के लिए क्या किया जाएगा? और वस्त्र, वेशभूषा और प्रतीक चिन्हों के माध्यम से जाति-प्रदर्शन से उपजे जातिगत भेदभाव को मिटाने के लिए क्या किया जाएगा? और किसी के मिलने पर नाम से पहले ‘जाति’ पूछने की जातिगत भेदभाव की मानसिकता को ख़त्म करने के लिए क्या किया जाएगा?
…और 5000 सालों से मन में बसे जातिगत भेदभाव को दूर करने के लिए क्या किया जाएगा?
और वस्त्र, वेशभूषा और प्रतीक चिन्हों के माध्यम से जाति-प्रदर्शन से उपजे जातिगत भेदभाव को मिटाने के लिए क्या किया जाएगा?
और किसी के मिलने पर नाम से पहले ‘जाति’ पूछने की जातिगत भेदभाव की मानसिकता को…
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— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) September 22, 2025
उन्होंने आगे लिखा, और किसी का घर धुलवाने की जातिगत भेदभाव की सोच का अंत करने के लिए क्या उपाय किया जाएगा? और किसी पर झूठे और अपमानजनक आरोप लगाकर बदनाम करने के जातिगत भेदभाव से भरी साज़िशों को समाप्त करने के लिए क्या किया जाएगा?
दरअसल, मुख्य सचिव ने अपने आदेश में कहा गया है कि, पुलिस अभिलेखों, सार्वजनिक संकेतों में जाति का प्रदर्शन रोका जाए और जातीय संघर्ष प्रेरित करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के क्राइम क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS) में अभियुक्तों की जाति बताने वाले कॉलम को हटाया जाए और अभियुक्तों के पिता के साथ मां का भी नाम दर्ज हो। वाहनों और सार्वजनिक स्थानों पर जाति का महिमामंडन करने वालों पर भी कार्रवाई को कहा गया है।