उद्यानिकी कृषि अनुसंधान समिति लखनऊ के तरफ से रविवार “विकसित भारत @2047 के लिए अगली पीढ़ी की कृषि: डिजिटल और जलवायु स्मार्ट नवाचारों का एकीकरण” विषय पर होटल बंधन में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें देश-विदेश के कृषि वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने कृषि क्षेत्र के भविष्य पर व्यापक चर्चा की।
लखनऊ। उद्यानिकी कृषि अनुसंधान समिति लखनऊ के तरफ से रविवार “विकसित भारत @2047 के लिए अगली पीढ़ी की कृषि: डिजिटल और जलवायु स्मार्ट नवाचारों का एकीकरण” विषय पर होटल बंधन में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें देश-विदेश के कृषि वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने कृषि क्षेत्र के भविष्य पर व्यापक चर्चा की।
सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए डिजिटल तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), बिग डेटा और जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों को अपनाना आवश्यक है।
विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना समय की मांग है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए जल संरक्षण, सटीक सिंचाई, मौसम आधारित कृषि सलाह और कम संसाधनों में अधिक उत्पादन देने वाली तकनीकों को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।

सेमिनार में विभिन्न देशों के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि डिजिटल कृषि और नवाचार आधारित खेती से उत्पादन बढ़ाने, लागत कम करने और किसानों की आय में वृद्धि करने में मदद मिल सकती है। साथ ही कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बनाया जा सकता है।
वक्ताओं ने कहा कि कृषि अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और किसानों तक ज्ञान के प्रभावी प्रसार के माध्यम से भारत खाद्य सुरक्षा को मजबूत करते हुए वैश्विक कृषि नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ सकता है। कार्यक्रम के दौरान कृषि क्षेत्र में उभरती तकनीकों, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और उनके समाधान पर विभिन्न तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए। सेमिनार का निष्कर्ष रहा कि डिजिटल और जलवायु-स्मार्ट नवाचारों का समन्वय विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सेमिनार के दौरान डिजिटल कृषि और AI आधारित तकनीकों पर जोर दिया गया। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए स्मार्ट खेती को बढ़ावा और किसानों की आय बढ़ाने और उत्पादकता सुधारने पर चर्चा की गई। साथ ही टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
उक्त कार्यक्रम में डॉ. इंद्र कुमार चौरसिया, संयोजक/निदेशक उद्यानिक कृषि अनुसंधान समिति, सेवानिवृत्त आईएएस अरविंद कुमार चौरसिया, डॉ. प्रतीक रंजन चौरसिया सहित अन्य सम्मानित गणमान्यजन उपस्थित रहे। सेमिनार के अन्त में उद्यानिकी कृषि अनुसंधान के चेयरमैन डॉ. इन्द्र कुमार चौरसिया ने आये हुए अतिथियों को धन्यवाद दिया।