Gayatri Jayanti 2026 : भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का एक अत्यंत गूढ़, और प्रेरणादायक महापर्व गायत्री जयंती है। माँ गायत्री को वेदमाता, देवमाता और विश्वमाता कहा जाता है। माता गायत्री संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त संतुलन, ऊर्जा और प्रखर मेधा की अधिष्ठात्री हैं।
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आदिशक्ति के साकार होने का प्रतीक
यह अनंत चेतना का स्मरण है, जिसने मानव जीवन को विचार, ज्ञान और आत्मबोध की दिशा प्रदान की। यह दिन उस आदिशक्ति के साकार होने का प्रतीक है, जिसने शून्य में शब्द भरे, सृष्टि को स्वर दिया और मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर विवेक के प्रकाश की ओर अग्रसर किया।
हर साल गायत्री जयंती पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन निर्जला एकादशी व्रत होता है। आइए जानते हैं गायत्री जयंती पर्व की पूजा का मुहूर्त क्या होगा।
निर्जला एकादशी व्रत
वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जून 2026 को शाम 06 बजकर 12 मिनट पर शुरु होगी। तिथि का समापन 25 जून को रात 08 बजकर 09 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, इस साल 25 जून 2026 को गायत्री जयंती पर्व मनाना बेहद शुभ होगा, क्योंकि इस दिन निर्जला एकादशी व्रत भी है।
सुगंधित फूलों की माला से श्रंगार करें
चौकी पर माता गायत्री के श्रीविग्रह या चित्र की स्थापना करें। माता गायत्री के सामने घी का दीपक जलाएं और धूपबत्ती जलाएं।
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गंगाजल से अभिषेक करें
इसके बाद गंगाजल से उनका अभिषेक करें। रोली से टीका कर अक्षत लगाएं। सुगंधित फूलों की माला से श्रंगार करें। मौसमी फल और मिठाई का भोग लगाएं। श्रद्धा भक्ति के साथ आरती करें।
गायत्री मंत्र
ऊं भूर्भूवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहिधियो यो नः प्रचोदयात्