Assam VIP Seat : राजनीति में मेहनत के साथ किस्मत का भी जोर मायने रखता है। 4 अप्रैल को असम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आएंगे। असम राज्य की 126 विधानसभा सीटों पर मतदान हो चुके हैं। इस चुनाव में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें कई दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। इस चुनावी जंग में सबसे बड़ा चेहरा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा हैं। सरमा अपनी पारंपरिक सीट जालुकबाड़ी से चुनाव लड़ रहे हैं। राज्य की बीआईपी सीटों पर जनता की निगाहें टिकी हुई है। राज्य में बीजेपी विकास के दावों को लेकर जनता के बीच में अपना प्रचार किया ,तो वहीं कांग्रेस ने बदलाव के नाम पर जनता से वोट मांगा।
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जहां मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के खिलाफ खिलाफ कांग्रेस ने यहां से बिदिशा नियोग को मैदान में उतारा है , वहीं कांग्रेस के दिग्गज नेता गौरव गोगोई जोरहाट सीट से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। गोगई का मुकाबला भाजपा के हितेंद्र नाथ गोस्वामी से है। इसी तरह गठबंधन का राजनीतिक समीकरण चुनाव को रोचक मुकाबले में बदल दिया।
इस बार का चुनाव मुख्य रूप से दो बड़े गुटों के बीच सिमटा हुआ है। एक तरफ सत्ताधारी भाजपा गठबंधन है, जिसमें असम गण परिषद और यूपीपीएल जैसे दल शामिल हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन ‘असम सम्मिलित मोर्चा’ है।
खोवांग सीट से लुरिनज्योति गोगोई
वहीं बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। अजमल इस बार बिन्नाकांडी सीट से चुनावी मैदान में हैं। उनके खिलाफ भाजपा ने यह सीट अपने सहयोगी दल AGP के लिए छोड़ी है। इसके अलावा खास बात ये है कि सिबसागर सीट से अखिल गोगोई और खोवांग सीट से लुरिनज्योति गोगोई भी विपक्षी गठबंधन की ताकत बढ़ा रहे हैं।
उम्मीदवारों ने ठोकी ताल
उम्मीदवारों की संख्या के मामले में कांग्रेस सबसे आगे खड़ी दिखाई दे रही है। कांग्रेस ने 99 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं, जबकि भाजपा 90 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। अन्य दलों की बात करें तो एआईयूडीएफ 30, एजीपी 26 और बीपीएफ 11 सीटों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने भी 18 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं।
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258 निर्दलीय उम्मीदवार
इनके अलावा 258 निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं, जो कई सीटों पर बड़े उलटफेर करने की क्षमता रखते हैं। छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों की सक्रियता ने कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया है।
अपनी-अपनी जीत के दावे
सरकार और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला जनता के हाथों में है।
असम का सियासी समीकरण
असम की सत्ता पर काबिज होने के लिए बहुमत का आंकड़ा 64 है। अब 4 मई को यह साफ हो जाएगा कि जनता ने बीजेपी के विकास के दावों पर मुहर लगाई है या कांग्रेस के बदलाव के वादे पर।