आज 24 मार्च रविवार को छोटी होली या होलिका दहन होगा और 25 मार्च को रंगो का त्यौहार होली मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में होलिका का बहुत महत्व है। इस दिन लोग गन्ना, बालियां और गाय के गोबर से बने उपलों को होलिका में डालते है और वहां से आग लाकर घर के आंगन में पूजा करते है। कई लोगो के अंदर जिज्ञासा रहती है कि होलिका में गोबर के उपले क्यों जलाएं जाते है। आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह।
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होलिका दहन में क्यों जलाए जाते हैं गोबर के उपले:
जानें महत्वहोलिका दहन में मुख्य रूप से गोबर से बड़कुल्ले बनाए जाते हैं। इसके लिए गोबर के छोटे-छोटे गोले बनाकर उसमें बीच से छेद करके धूप में सुखाया जाता है और इसकी माला को होलिका की अग्नि में जलाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि… pic.twitter.com/zF9l5pDt2M
— Jaya_Upadhyaya (@Jayalko1) March 24, 2024
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होलिका दहन में मुख्य रूप से गोबर से बड़कुल्ले बनाए जाते हैं। इसके लिए गोबर के छोटे-छोटे गोले बनाकर उसमें बीच से छेद करके धूप में सुखाया जाता है और इसकी माला को होलिका की अग्नि में जलाया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि इन्हें जलाने से घर की सभी परेशानियां/नकारात्मक शक्तियों को दूर भगाने में मदद मिलती है। गोबर के उपले जलाने के स्वास्थ्य लाभ भी हैं।
गोबर के उपले में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो हानिकारक बैक्टीरिया को मारते हैं। होलिका दहन के समय सर्दी का मौसम समाप्त हो रहा होता है और गर्मी का मौसम शुरू हो रहा होता है। इस दौरान बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। गोबर के उपले जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और बीमारियों का खतरा कम होता है।