नई दिल्ली। यदि आपने भी कभी किसी खाली कमरे में जाकर जोर से कुछ बोला है तो आपने महसूस किया होगा कि आपकी आवाज सामान्य कमरे की तुलना में ज्यादा तेज और गूंजती हुई सुनाई देती है। लेकिन क्या आप जानते है कि ऐसा क्यों होता है? इसके पीछे कोई रहस्य नहीं, बल्कि ध्वनि का परावर्तन काम करता है।
पढ़ें :- 'भारत छोड़ो नोटिस' पर एक्टर इमरान खान कोर्ट में बोले-'जिंदगी में कभी किसी प्रोटेस्ट में नहीं जाऊंगा...'
दीवारों से टकराकर लौटती है आवाज
जब भी हम बोलते हैं तो ध्वनि तरंगों के रूप में हमारी आवाज हवा में फैलती है। जब ये तरंगें दीवार, फर्श या छत जैसी कठोर सतह से टकराती हैं तो उनका एक हिस्सा वापस लौट जाता है। इसे ध्वनि का परावर्तन कहा जाता है। खाली कमरे में कोई भी समान नहीं होता है, इसलिए ध्वनि तरंगों को सोखने वाला पदार्थ कम होता है और आवाज कठोर सतहों से बार-बार टकराकर कमरे में लगातार घूमती रहती है। इसी कारणवश आवाज कुछ देर तक बनी रहती है और कमरा गूंजता हुआ महसूस होता है।
भरे कमरे में गूंज कम क्यों होती है?
अब यदि उसी खाली कमरे में फर्नीचर, पर्दे, कालीन और सोफा रख दिए जाएं तो स्थिति पूरी तरह से बदल जाती है। ये नरम और छिद्रयुक्त चीजें ध्वनि की कुछ ऊर्जा को सोख लेती हैं। इससे दीवारों से वापस आने वाली ध्वनि काफी कम हो जाती है और आवाज ज्यादा साफ सुनाई देती है।
पढ़ें :- मोदी जी,आप विदेशी मदद से बने हैं प्रधानमंत्री, मैं आपको किसी भी मंच और समय में खुली बहस की चुनौती देता हूं, हिम्मत है तो आइए : राहुल गांंधी
प्रतिध्वनि और गूँज में अंतर
सबसे दिलचस्प बात यह है कि हर गूंज को तकनीकी रूप से Echo यानी प्रतिध्वनि नहीं कहा जाता। यदि मूल आवाज और परावर्तित आवाज के बीच पर्याप्त समय का अंतर हो, तो हमें आवाज अलग से दोबारा सुनाई दे सकती है, इसे Echo या प्रतिध्वनि कहते हैं। आम तौर पर स्पष्ट Echo यानी प्रतिध्वनी के लिए परावर्तक सतह करीब 17 मीटर या उससे अधिक दूर होनी चाहिए। छोटे कमरे में अक्सर अलग प्रतिध्वनि सुनाई देने के बजाय लगातार गूँज महसूस होती है।