नई दिल्ली। भारत में शादी को हमेशा से जीवन का सबसे जरूरी हिस्सा माना गया है। लेकिन बदलते दौर के साथ देश के युवाओं, खास तौर पर Gen-Z की सोच में बड़ा बदलाव आ रहा है। एक नए ट्रेंड और सामाजिक बदलाव की मानें तो आने वाले 20 सालों में भारतीय महिलाएं शादी करने से दूरी बना सकती हैं। शादी के पारंपरिक बंधन में बंधने के बजाय, आज की युवा महिलाएं सिंगल रहने और ‘सिंगल पैरेंटिंग’ को तवज्जो दे रही हैं।
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शादी से दूरी क्यों बना रहे है Gen-Z?
आज की महिलाएं करियर और अपनी पढ़ाई को पहली प्राथमिकता दे रही हैं। खुद के पैरों पर खड़े होने के बाद वे किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। Gen-Z महिलाए अपनी लाइफस्टाइल, फैसलों और आजादी के साथ समझौता नहीं करना चाहती। शादी के बाद आने वाली पारिवारिक बंदिशों में उलझना नही चाहती। समाज में बढ़ते तलाक के मामलों और असफल रिश्तों को देखकर युवाओं का शादी के सिस्टम से भरोसा कम हो रहा है।
सिंगल पैरेंटिंग और गोद लेने का बढ़ता क्रेज
बिना शादी के रहना अब अकेलेपन का प्रतीक नहीं माना जा रहा। महिलाएं मां बनने का सुख तो पाना चाहती हैं, लेकिन इसके लिए शादी को जरूरी नहीं मानतीं।
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बच्चा गोद लेना (Adoption)
भारतीय कानूनों के तहत अब सिंगल महिलाएं भी बच्चा गोद ले सकती हैं। कई युवा महिलाएं 30 से 35 की उम्र के बाद बिना शादी के बच्चा गोद लेने का मन बना रही हैं। आधुनिक मेडिकल तकनीक (IVF और Surrogacy) साइंस और मेडिकल सुविधाओं के बेहतर होने से अब सिंगल महिलाओं के लिए मां बनना आसान हो गया है। IVF और एग फ्रीजिंग जैसे विकल्प उन्हें यह आजादी देते हैं कि वे जब चाहें, बिना किसी पार्टनर के मां बन सकती है।
क्या समाज इस बदलाव के लिए तैयार है?
भारतीय समाज में आज भी बिना शादी के रहना या अकेले बच्चे को संभालना आसान नहीं है। लेकिन महानगरों से शुरू हुआ यह बदलाव धीरे-धीरे छोटे शहरों तक भी पहुंच रहा है। युवा का मानना है कि एक गलत रिश्ते या शादी में रहने से कहीं बेहतर है कि इंसान अकेला रहे और अपनी शर्तों पर जिंदगी जिए। आने वाले अगले 20 सालों में यह बदलाव भारत के पारिवारिक ढांचे को पूरी तरह बदल सकता है। अब देखना यह होगा कि हमारा समाज इस नई सोच को कितनी जल्दी स्वीकार करता है।
रिर्पोट:
दीपांजली मिश्रा