ददरौल विधानसभा: शाहजहांपुर की ददरौल विधानसभा सीट जहां कभी सपा और बसपा का दबदबा हुआ करता था, लेकिन पिछले कुछ चुनावों में यहां बीजेपी ने ऐसा कब्जा जमाया कि अब सवाल है- क्या 2027 में भी कमल खिलेगा या सपा PDA के सहारे इस सियासी किले में सेंध लगा पाएगी, ददरौल की सियासत में बीजेपी का पलड़ा फिलहाल भारी नजर आता है। 2017 और 2022 में बीजेपी के मानवेंद्र सिंह ने जीत दर्ज की। इसके बाद 2024 के उपचुनाव में उनके बेटे अरविंद सिंह ने जीत हासिल कर बीजेपी का कब्जा बरकरार रखा।
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बीजेपी की ओर से मौजूदा विधायक अरविंद सिंह की दावेदारी फिलहाल मजबूत मानी जा रही है। बीजेपी अपनी मजबूत स्थिति के पीछे विकास और इलाके में हुए इंफ्रास्ट्रक्चर कामों को बड़ा मुद्दा मान रही है। गंगा एक्सप्रेसवे, बरेली मोड़ से जलालाबाद तक फोरलेन सड़क और दूसरी सड़कों के निर्माण को पार्टी अपनी उपलब्धि के तौर पर गिना रही है। मौजूदा विधायक अरविंद सिंह का दावा है कि उनके परिवार की जनसेवा ने जनता का भरोसा कायम रखा है।
वहीं, सपा 2027 में PDA यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वोटों के समीकरण पर भरोसा कर रही है। पार्टी का दावा है कि उसका जनाधार बढ़ा है और अगर सामाजिक समीकरण एकजुट हुआ तो बीजेपी को कड़ी चुनौती दी जा सकती है। हालांकि सपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती मजबूत और सर्वमान्य चेहरे को लेकर है।
अब बात करें ददरौल के जातीय गणित की, तो यहां करीब सवा तीन लाख से ज्यादा मतदाता हैं। इनमें करीब 58 हजार दलित, 57 हजार अन्य OBC, 55 हजार क्षत्रिय, 53 हजार लोधी और 32 हजार मुस्लिम मतदाता बताए जाते हैं। यही वोट बैंक चुनाव की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
टिकट की रेस भी दिलचस्प है। बीजेपी में मौजूदा विधायक अरविंद सिंह का नाम सबसे मजबूत माना जा रहा है, जबकि जेपीएस राठौर और राजेश वर्मा के नाम की भी चर्चा है। वहीं सपा में पूर्व मंत्री अवधेश वर्मा समेत कई चेहरे दावेदारी में बताए जा रहे हैं।
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फिलहाल ग्राउंड पर बीजेपी मजबूत दिखाई दे रही है, लेकिन अगर सपा PDA समीकरण को जमीन पर उतारने में कामयाब रही, तो मुकाबला बेहद कांटे का हो सकता है।