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ऐसा झरना जिसका पानी नीचे गिरने के बजाय उल्टा बादलों में जाता है, क्या है प्रकृति के इस अनोखा नजारे का रहस्य

By Kalpna Pandey 
Updated Date

Reverse Waterfall: हमारे भारत में बड़ी संख्या में अनोखी खूबसूरती और रहस्य से भरे हुए प्राकृतिक स्थान हैं। सब अपनी किसी न किसी खासियत के लिए मशहूर है। आज हम इन्हीं स्थानों में से एक हैरतअंगेज झरने के बारे में आपको बताऐंगे जो अपनी उल्टी बहने वाली पानी की विशेषता के कारण आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

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ये झरना मौजूद है महाराष्ट्र के नाणेघाट में। जो पश्चिमी घाट की पहाड़ियों में स्थित एक ऐतिहासिक दर्रा है। इसका इतिहास करीब 2000 साल पुराना माना जाता है। अगर आप यहां साल में किसी भी समय जाएंगे तो ट्रैकिंग और हरियाली के लिए यह एकदम बढ़िया जगह है, लेकिन मानसून यानी बारिश के वक्त अगर आप पहली बार यहां विजिट करते हैं तो शायद इस रिवर्स वाटरफाल का नजारा आपको हैरत में डाल दे। वैसे तो इसके नाम (रिवर्स वाटरफाल) से ही आपने अंदाजा लगा लिया होगा कि, उल्टा बहने वाला झरना।

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जी हां, इस झरने की यही बड़ी खासियत है कि इसका पानी नीचे गिरने के बजाय ऊपर की ओर उड़ता हुआ दिखाई देता है। यही वजह है कि इसका नाम Reverse Waterfall रखा गया। कभी सातवाहन काल में व्यापारिक मार्ग के रूप में इस्तेमाल किये जाने वाली यह जगह, आज मानसून ट्रैकिंग और प्राकृतिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है। बारिश के दौरान यहां बनने वाला रिवर्स वॉटरफॉल पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बन जाता है। दूर से देखने पर ऐसा लगता है कि झरने का पानी नीचे बहने की बजाय आसमान की ओर उड़ रहा है। अक्सर सोशल मीडिया पर इसके वीडियो भी वायरल होते रहते हैं और खासकर मानसून में तो सोशल मीडिया पर यही छाया रहता है, जिसे कई लोग किसी चमत्कार से जोड़कर देखते हैं। लेकिन आपको बता दें कि इसके पीछे कोई चमत्कार नहीं बल्कि प्राकृतिक और वैज्ञानिक कारण हैं।

तेज हवा बनाती है इस नजारे को रहस्यमयी

इस हैरतअंगेज दृश्य का कारण कुछ और नहीं बल्कि तेज हवा का दबाव है, जो गुरुत्वाकर्षण के नियम के विपरीत होता है। बरसात के मौसम में कई बार नाणेघाट की ऊंची पहाड़ियों पर हवा की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे और कभी-कभी तो उससे भी अधिक हो जाती है। जब पानी झरने की ऊंचाई से नीचे गिरता है, तो वह छोटी-छोटी बूंदों में टूट जाता है। तभी तेज हवा के चलते ये हल्की बूंदें नीचे गिरने से पहले ही ऊपर और पीछे की ओर धकेल उठती हैं और बूंदें वापस पहाड़ी की चोटी की ओर चली जाती हैं। इस दृश्य से ऐसा भ्रम पैदा होता है कि पूरा झरना उल्टी दिशा में बह रहा है। लेकिन यहां वास्तव में पानी नीचे ही गिरता है, लेकिन उसकी महीन छोटी-छोटी बूंदें हवा के प्रभाव से ऊपर उड़ती हुई दिखाई देती हैं।

पूरे साल में केवल एकबार ही दिखता है ये दृश्य

रिवर्स वॉटरफॉल का ये अद्भुत नजारा पूरे साल नहीं दिखाई देता। यह मुख्य रूप से जून से सितंबर के बीच, यानी मानसून के दौरान देखने को मिलता है। वजह, इसी समय झरनों में पर्याप्त पानी होता है और पश्चिमी घाट में तेज हवाएं चलती हैं। अगर वहीं हवा की गति कम हो जाए या बारिश न हो, तो यह रिवर्स वॉटरफॉल अन्य झरनों की भांति सामान्य तरीके से नीचे गिरता हुआ दिखाई देता है। इसलिए इस प्राकृतिक घटना को देखने के लिए सही मौसम का होना बेहद आवश्यक है।

हर वर्ष मानसून के दौरान हजारों की संख्या में पर्यटक और ट्रैकिंग के शौकीन लोग नाणेघाट पहुंचकर यहां का लुत्फ उठाते हैं, वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी करते हैं। रिवर्स वॉटरफॉल की प्राकृतिक घटना, हरी-भरी घाटियां और बादलों से ढकी हुई पहाड़ियां ये सब नजारा लोगों को अपनी ओर खींच लाता है।

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