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अभिजीत दिपके, बोले-‘मोदी की तानाशाही खत्म होने तक जारी रहेगा आंदोलन ’,अब पूरा देश बनेगा जंतर-मंतर

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और धरना देने की जगह जंतर-मंतर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। दिल्ली पुलिस के नए आदेश के मुताबिक, ऐतिहासिक जंतर-मंतर को अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में मान्यता नहीं दी गई है। इसकी जगह रामलीला मैदान (Ramlila Maidan), बुराड़ी मैदान (Burari Maidan) और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान (CBD Ground in East Delhi)को प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थलों के तौर पर तय किया गया है। दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के इस फैसले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके (Abhijit Dipke) और सह संयोजक सौरव दास (Co-convener Sourav Das) ने सरकार पर निशाना साधा है।

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‘अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा’

जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। दिपके ने इस फैसले पर तंज कसते हुए कहा कि जंतर-मंतर अब प्रदर्शन स्थल नहीं रहा, जबकि उनके मुताबिक वहां पहले ही विरोध प्रदर्शनों को युद्धक्षेत्र में तब्दील कर दिया गया था। उन्होंने तानाशाही का आरोप लगाते हुए सत्ता पर निशाना साधा और नारा दिया, ‘अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा’।

‘दादी के निधन के बीच परिवार को भी किया परेशान’

दिपके ने सरकार पर आगे निशाना साधते हुए कहा कि उनकी दादी के निधन से परिवार पहले ही दुख में था। ऐसे समय में पुलिस के रवैये ने उनकी और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ा दी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पुलिस ने उन्हें दादी के निधन की जानकारी दे दी थी, तो रात करीब 3:30 बजे गिरफ्तारी के कागजात लेकर उनके पास क्यों पहुंची और हस्ताक्षर करने के लिए क्यों कहा? उन्होंने बताया कि पुलिस ने उन्हें माता-पिता से बात करने को कहा था, लेकिन उन्होंने उनकी खराब सेहत का हवाला देते हुए उस समय बात करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपने चचेरे भाई से संपर्क करने की इच्छा जताई, लेकिन उनके अनुसार पुलिस ने फोन से नंबर निकालने नहीं दिया। दिपके ने आरोप लगाया कि पुलिस का मकसद उन्हें तनाव देना और पहले से दुखी उनके माता-पिता की परेशानी बढ़ाना था। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को अपने परिवार के लिए मानसिक प्रताड़ना बताया।

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दिपके ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित तानाशाही के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए नागरिकों के खिलाफ सख्त रुख अपना रही है। आखिर ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री मोदी के लिए इतने जरूरी क्यों हैं कि उनके बचाव में सरकार और पुलिस को देश के नागरिकों से टकराव की स्थिति में आना पड़ रहा है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी दिपके ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं, पत्रकारों और यहां तक कि सांसदों के साथ भी पुलिस मारपीट कर रही है। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को टैग करते हुए सरकार पर अपने ही देश के लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने और तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

सरकार क्यों डरी हुई है?

जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने पर सीजेपी के सौरव दास ने सवाल उठाया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पूछा है कि आखिर नरेंद्र मोदी जंतर-मंतर से क्यों डरते हैं? उन्होंने इस फैसले को सरकार की आलोचना करने और अपनी आवाज उठाने वाले लोगों के अधिकारों से जोड़ते हुए सवाल किया कि अगर सरकार जनता की आवाज सुनने के लिए तैयार है, तो विरोध प्रदर्शन के लिए तय जगह को ही सूची से हटाने की जरूरत क्यों पड़ी? इस मुद्दे ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सरकार के प्रति असहमति जताने की स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज कर दी है।

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