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अखिलेश यादव, बोले-जो बच्चों के मुंह से छीन रहे हैं दूध, उनका पाप ही उनको ले डूबेगा, हजारों करोड़ के बजट में दूध शामिल है या पानी?

By संतोष सिंह 
Updated Date

लखनऊ। यूपी के महोबा सदर तहसील के ढिकवाहा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें रसोइया एक पानी से भरी बाल्टी में (500 ग्राम) दूध के दो पैके़ट काटकर मिलाती है और बच्चों को मिड डे मील के तौर पर बांटती है। इस वीडियो को शेयर करते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने शनिवार को लिखा कि भाजपा सरकार में बच्चों को मिल रहा है ‘पौष्टिक पानी’। बच्चों के माता-पिता पूछ रहे हैं कि हजारों करोड़ के बजट में दूध शामिल है या पानी?

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 ‘वन-टू का फोर’ तो सुना था यहां तो ‘वन-टू का एट’ टाइपवाला ‘महा-मिलावट घोटाला’ चल रहा है

उन्होनें लिखा कि ‘वन-टू का फोर’ तो सुना था यहां तो ‘वन-टू का एट’ टाइपवाला ‘महा-मिलावट घोटाला’ चल रहा है। मिलावट के ख़िलाफ़ भाजपा सरकार का ऐलान क्या कमीशन की रेट बढ़ाने का दवाब मात्र तो नहीं। जो बच्चों के मुंह से दूध छीन रहे हैं, उनका पाप ही उनको ले डूबेगा। बच्चों का मोल परिवारवाले ही जानते हैं। भाजपा सरकार का भ्रष्टाचार, उनके हर काम को कुकर्म में बदल देता है। बेहद शर्मनाक और घोर निंदनीय।

परम पूज्य शंकराचार्य जी के बारे में घोर अपमानजनक अपशब्द बोलना, शाब्दिक हिंसा है और पाप भी

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने एक्स पर लिखा कि पहन ले कोई जैसे भी ‘चोले’, पर उसकी वाणी पोल खोले। उन्होंने कहा कि परम पूज्य शंकराचार्य जी के बारे में घोर अपमानजनक अपशब्द बोलना, शाब्दिक हिंसा है और पाप भी। ऐसा कहने वाले के साथ-साथ उनको भी पाप पड़ेगा जिन्होंने चापलूसी में मेजें थपथपाई हैं। जब भाजपा के विधायक सदन के बाहर जाएंगे और जनता का सामना करेंगे तो जनता सड़क पर उनका सदन लगा देगी।

 

अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कहा कि जो महाकुंभ की मौतों पर सच्चे आँकड़े नहीं बताते हैं, कैश में मुआवज़ा देकर उसमें भी भ्रष्टाचार का रास्ता निकाल लेते हैं; जिन तक मुआवज़ा नहीं पहुँचा, उनका पैसा कहां गया, ये नहीं बताते हैं, अपने ऊपर लगे मुक़दमे हटवाते हैं वो किसी और के ‘धर्म-पद’ पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं रखते हैं। अपने बयान में उन्होंने ‘क़ानून का शासन’ बोल दिया, जैसे ही इस बात पर उनका ध्यान जाएगा वो ‘विधि का शासन’ बोलने के लिए क्या दुबारा सदन बुलाएंगे या इसके लिए एक टाँग पर खड़े होकर ‘लड़खड़ाता प्रायश्चित’ करेंगे।

अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कहा कि जब इंसान नहीं, अहंकार बोलता है तो यही होता है। अहंकार संस्कार को विकार में बदल देता है। वो व्यक्ति समाज में मान-सम्मान खो देता है, जिसके बारे में ये कहावत प्रचलित हो जाती है कि जब मुंह खोला, तब बुरा बोला।

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शंकराचार्य जी पर दिया गया अभद्र बयान सदन में हमेशा के लिए दर्ज़ हो गया है

‘हाता नहीं भाता’ का ये विस्तारित रूप है, यही सच्ची सच्चाई है। जिस समाज के ख़िलाफ़ रहकर उन्होंने हमेशा अपनी नफ़रत की राजनीति की है, उसे धर्म के मामले में भी अपमानित-पराजित करने का ये उनका अंहकार है। इनका बस चले तो जो विवादित फ़िल्म आई है उसका नाम बदले बिना ही रिलीज़ भी कर दें और टैक्स फ़्री भी कर दें। अगले चुनाव में वो समाज एक-एक वोट उनके ख़िलाफ़ डालकर अपने अपमान और उनके प्रदेश अध्यक्ष के नोटिस का सही जवाब देगा, उनकी सरकार हटाकर नयी सरकार बनाएगा फिर इत्मीनान-आराम से मिलजुलकर बेधड़क दाल-बाटी खाएगा। शंकराचार्य जी पर दिया गया अभद्र बयान सदन में हमेशा के लिए दर्ज़ हो गया है। उनके इस बयान को हम निंदनीय कहें तो निंदनीय शब्द को भी निंदनीय महसूस होगा।

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