नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील पर विपक्ष लगातार सवाल खड़े कर रहा है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Samajwadi Party President Akhilesh Yadav) ने इस डील को ‘किसानों’ के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि भाजपा (BJP) ने फिर किसानों पर बड़ा हमला बोला है। वो जवाब दे कि क्या दबाव है। वहीं, कांग्रेस ने कहा कि ट्रंप की घोषणाएं सामरिक रूप से गंभीर सवाल खड़े करने वाली है। विपक्षी दलों ने इस समझौते पर तमाम गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे किसानों के हितों के खिलाफ करार दिया है, जबकि सरकार इसे घरेलू उद्योग, MSMEs और किसानों के लिए नए अवसरों वाला कदम बता रही है।
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भाजपा ने फिर किया ‘किसानों’ पर वार
भाजपा सरकार दे जवाब, क्या है दबावभारत के बाज़ार को अमेरिकी कृषि उत्पादों व खाद्यान्नों के लिए खोल देना, हमारे देश की खेती-किसानी पर रोज़ी-बसर करने वाली 70% आबादी के साथ धोखा है।
भाजपाई और उनके संगी-साथी आज़ादी से पहले भी विदेशियों के एजेंट…
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) February 3, 2026
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समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने इस डील को किसानों के साथ ‘धोखा’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय बाजार को अमेरिकी कृषि उत्पादों और खाद्यान्नों के लिए खोलना देश की खेती-किसानी पर निर्भर 70 फीसदी आबादी के हितों के खिलाफ है। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कहा कि इससे किसानों की आय कम होगी और खाद्यान्न बाजार में मुनाफाखोरी तथा बिचौलियों की नई जमात खड़ी हो सकती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि इससे महंगाई बढ़ेगी और धीरे-धीरे किसान मजबूर होकर अपनी जमीन बड़े कॉरपोरेट घरानों को बेचने पर मजबूर हो सकते हैं। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने भाजपा पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि ‘BJP हटाओ, किसान बचाओ’ ही वक़्त की मांग है।
कांग्रेस ने भारत-US ‘डील’ पर जताई चिंता
Not Make in India, But Sell India pic.twitter.com/ZJvIWlAOtR
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— Congress (@INCIndia) February 3, 2026
कांग्रेस ने भी डील पर चिंता जताई है। पार्टी का कहना है कि कृषि सेक्टर को खोलना सामरिक और आर्थिक रूप से गंभीर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस ने सरकार से इस समझौते का मसौदा सार्वजनिक करने की मांग की है।
हालांकि, इस डील पर इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने खुशी जताई है। फेडरेशन के अनुसार, अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर टैरिफ 25% से कम कर के 18% किए जाने से भारतीय चावल निर्यातकों को बड़ा लाभ होगा। इससे भारतीय चावल को थाईलैंड और पाकिस्तान जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर दर्जा मिलेगा।