SP PDA Plus Plan: उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो चुकी हैं और सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिमी यूपी के सियासी समीकरणों की है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव अब यहां एक नए सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले पर काम करते नजर आ रहे हैं। कभी पश्चिमी यूपी में जाट-मुस्लिम गठजोड़ सपा और आरएलडी की रणनीति का अहम हिस्सा हुआ करता था, लेकिन अब सियासी तस्वीर बदल चुकी है।
पढ़ें :- चुनावी आहट के बीच युवाओं को बड़ा तोहफा! CM योगी का ऐलान- 6 महीने में 1 लाख सरकारी नियुक्तियां
आरएलडी अध्यक्ष जयंत चौधरी बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ हैं, ऐसे में अखिलेश यादव के सामने पुराने जाट-मुस्लिम समीकरण को दोहराने की चुनौती है। इसी वजह से सपा अब मुस्लिम, दलित और गुर्जर वोटों को साधने की कोशिश में जुटी है। पार्टी की रणनीति में मुस्लिम और यादव को अपना पारंपरिक आधार मानते हुए इसमें दलित और गुर्जर वोट जोड़ने की कोशिश की जा रही है। खास बात ये है कि इस बार सपा की नजर जाट की जगह गुर्जर वोट बैंक पर ज्यादा दिखाई दे रही है।
पश्चिमी यूपी के कई इलाकों में गुर्जर मतदाताओं की अच्छी मौजूदगी है और सपा इन्हीं प्रभावी इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। वहीं, दलित वोटों को लेकर भी अखिलेश यादव की उम्मीदें 2024 के लोकसभा चुनाव के अनुभव से बढ़ी हैं। सपा ने पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक रणनीति के जरिए गैर-यादव ओबीसी और दलित वोटों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की थी। अब पार्टी इसी प्रयोग को पश्चिमी यूपी में आगे बढ़ाना चाहती है।
पश्चिमी यूपी की 136 विधानसभा सीटें चुनावी लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही हैं। सपा के लिए यहां करीब 50 सीटों का आंकड़ा हासिल करना बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। लेकिन इसके लिए सिर्फ समीकरण बनाना काफी नहीं होगा। उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय नेताओं की पकड़ और सबसे बड़ी बात—वोटों का वास्तविक ट्रांसफर नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाएगा। अखिलेश यादव के सामने एक और चुनौती है गुर्जर समाज के बीच मजबूत राजनीतिक चेहरा खड़ा करना और संगठन में इन समुदायों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना।
तो 2027 में पश्चिमी यूपी का मुकाबला सिर्फ बीजेपी और सपा के बीच नहीं होगा, बल्कि जाट, गुर्जर, दलित, मुस्लिम और गैर-यादव ओबीसी वोटों की सोशल इंजीनियरिंग के बीच भी होगा। अब देखना होगा कि अखिलेश यादव का ये PDA Plus फॉर्मूला जमीन पर कितना असर दिखाता है और क्या पश्चिमी यूपी में जाट के सियासी विकल्प के तौर पर गुर्जर को खड़ा करने की रणनीति सपा के लिए कामयाब होती है?फिलहाल इतना तय है कि 2027 की सत्ता की लड़ाई में पश्चिमी यूपी एक बार फिर बड़ा सियासी रणक्षेत्र बनने जा रहा है।