नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला किया है। ट्रंप का कहना है कि रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर उन्होंने अतिरिक्त टैरिफ का बोझ डाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति (US President ) के इस फैसले की अमेरिका के भी कई दिग्गजों ने निंदा की है। अमेरिकी पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार रिक सांचेज (Rick Sanchez) ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा भारत पर लगाया गया टैरिफ अपमानजनक और अज्ञानपूर्ण नीति का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह फैसला भारत के साथ स्कूली बच्चों की तरह व्यवहार करने के समान है।
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‘भारत बड़ा लड़का है, स्कूली बच्चा नहीं’
रिक सांचेज (Rick Sanchez) ने कहा कि ट्रंप प्रशासन का ये फैसला पूरी तरीके से अपमानजनक है। सांचेज ने कहा कि अमेरिका रूस के दृष्टिकोण से यूक्रेन युद्ध के कारणों को नहीं समझता है। उन्होंने समझाते हुए कहा कि ये यह अपमानजनक तब होता है जब आप भारत जैसे देश के साथ, उसके इतिहास, संसाधनों और क्षमताओं के बावजूद, एक स्कूली बच्चे जैसा व्यवहार करना शुरू कर देते हैं। बहुत से लोग सोचते हैं कि भारत की शुरुआत गांधी से हुई थी। हालांकि, भारत ने दुनिया के लिए जो किया है, वह उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि यूरोप और मेसोपोटामिया ने हासिल किया है। यह लगभग ऐसा है जैसे वे भारत के साथ ऐसा व्यवहार कर रहे हैं जैसे वे स्कूली बच्चे हों, जिन्हें बताया जाना चाहिए कि क्या करना है? भारत बड़ा लड़का है, स्कूली बच्चा नहीं।
भारत ने दिया सीधा जवाब, आप हमें यह नहीं बताएंगे कि हम किससे तेल खरीद सकते हैं और किससे नहीं?
बता दें कि इस साक्षात्कार के दौरान उन्होंने कहा कि आप हमें यह नहीं बताएंगे कि हम किससे तेल खरीद सकते हैं और किससे नहीं? तो यह एक विनाशकारी और परिवर्तनकारी क्षण था। इतिहासकार एक दिन पीछे मुड़कर देखेंगे और कहेंगे कि यही वह समय था जब द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से दुनिया पर शासन कर रहे पुराने यूरोपीय अमेरिका की शक्ति सचमुच कम होने लगी थी।
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उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका का पतन हो रहा है। शक्ति के दृष्टिकोण से, यह वैश्विक दक्षिण की ओर स्थानांतरित होने जा रहा है, जिसमें प्रमुख देश भारत और चीन के साथ-साथ रूस, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील भी होंगे।
ट्रंप के मध्यस्थता वाले दावे पर सांचेज ने क्या कहा?
इस दौरान सांचेज ने कहा ट्रंप के बार-बार दिए गए उन दावों का भी जिक्र किया जिनमें उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम की मध्यस्थता की थी, जबकि नई दिल्ली ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं हुई थी। युद्धविराम पाकिस्तान के डीजीएमओ (DGMO) द्वारा अपने भारतीय समकक्ष को फोन करने के बाद हुआ था।