Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. उत्तर प्रदेश
  3. आगरा का नटवरलाल शोभिक गोयल का एक और बड़ा फर्जीवाड़ा, हाईस्कूल और इं​टर मार्कशीट निकली फर्जी

आगरा का नटवरलाल शोभिक गोयल का एक और बड़ा फर्जीवाड़ा, हाईस्कूल और इं​टर मार्कशीट निकली फर्जी

By टीम पर्दाफाश 
Updated Date

लखनऊ। आगरा के नटवरलाल शोभिक गोयल का एक और बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों में घिरे शोभिक गोयल की हाईस्कूल और इंटर की मार्कशीट भी फर्जी पाई गयी है। शिकायत के बाद मामले की जांच पड़ताल की गयी, जिसमें सामने आया कि आरोपी की मार्कशीट फर्जी है। माध्यमिक शिक्षा परिषद के क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ के पत्र में शोभिक गोयल का फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। परिषद के अभिलेखों के मुताबिक, जिन अनुक्रमांकों का जिक्र शिकायत में किया गया है, वे दूसरे परीक्षार्थियों को आवंटित थे।

पढ़ें :- यूपी की हाई स्कूल परीक्षा में तीसरा और दसवां स्थान प्राप्त करने वाली ऋतु गर्ग और इरम फातिमा बनी 1 दिन की उप जिलाधिकारी और तहसीलदार

दरअसल, शिकायतकर्ता ने शोभिक गोयल के हाईस्कूल और इंटर की मार्कशीट को फर्जी बताते हुए शिकातय की थी। जांच के बाद माध्यमिक शिक्षा परिषद के क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ की ओर से जारी एक पत्र में शोभिक गोयल के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाणपत्रों को लेकर चौंकाने वाली जानकारी दी गई है। पत्र में बताया गया कि, शोभिक गोयल पुत्र अशोक कुमार गोयल के नाम से जुड़े वर्ष 2004 के हाईस्कूल और वर्ष 2006 के इंटरमीटिएट के अनुक्रमांकों के संबंध में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है।


​
पत्र में दर्ज जानकारी के अनुसार, हाईस्कूल परीक्षा वर्ष 2004 का अनुक्रमांक 0024241 रुचि कुशवाहा पुत्री अरविंद कुमार कुशवाहा को आवंटित था। उन्होंने एसबीओआर हाईस्कूल, खेडिया मोड़, आगरा से परीक्षा उत्तीर्ण की थी। वहीं, इंटरमीडिएट परीक्षा वर्ष 2006 का अनुक्रमांक 069569 राशदा बानो पुत्री इदरीश को आवंटित था। उन्होंने एमएल कन्या इंटर कॉलेज, बेवर, मैनपुरी से परीक्षा उत्तीर्ण की थी।

सबसे अहम बात यह है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद के क्षेत्रीय कार्यालय के पत्र में स्पष्ट किया गया है कि शोभिक गोयल पुत्र अशोक कुमार गोयल न तो इन परीक्षाओं में शामिल हुए थे और न ही परिषद की ओर से उनके नाम पर इन अनुक्रमांकों के आधार पर कोई अंकपत्र या प्रमाणपत्र जारी किया गया था। दरअसल, शिकायतकर्ताओं मोहित उपाध्याय और अर्पित शर्मा ने आरोप लगाया था कि इन अनुक्रमांकों के आधार पर कूटरचित शैक्षिक प्रमाणपत्र तैयार कर उनका दुरुपयोग किया जा रहा है। मामले की जांच के दौरान परिषद ने अपने अभिलेखों का मिलान किया और दोनों अनुक्रमांकों पर अलग-अलग परीक्षार्थियों के नाम होने की जानकारी दी।

अब इस मामले में कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर दूसरे परीक्षार्थियों के अनुक्रमांक पर शोभिक गोयल के नाम से प्रमाणपत्रों का मामला कैसे सामने आया? इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कहां किया गया? और इस कथित फर्जीवाड़े में कौन-कौन शामिल है?

Advertisement