Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. एस्ट्रोलोजी
  3. Ayodhya jhulnotsav  :  सावन शुक्ल तृतीया से झूले पर विराजेंगे रामलला , 15 अगस्त से 12 दिवसीय ऐतिहासिक झूलनोत्सव

Ayodhya jhulnotsav  :  सावन शुक्ल तृतीया से झूले पर विराजेंगे रामलला , 15 अगस्त से 12 दिवसीय ऐतिहासिक झूलनोत्सव

By अनूप कुमार 
Updated Date

Ayodhya jhulnotsav : अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में करीब 498 वर्षों के बाद एक ऐतिहासिक परंपरा बदलने जा रही है। इस बार रामलला नाग पंचमी के स्थान पर सावन शुक्ल तृतीया (15 अगस्त) की शाम 7 बजे से 12 दिवसीय भव्य झूलनोत्सव के तहत झूले पर विराजमान होंगे।

पढ़ें :- 07 अक्टूबर 2026 का राशिफल: बुधवार के दिन इन राशियों को मेहनत का मिलेगा अच्छा परिणाम

15 अगस्त की शाम सात बजे से शुरू होने वाला यह 12 दिवसीय उत्सव राम मंदिर के भव्य निर्माण के बाद अब तक के सबसे विशेष आयोजनों में शामिल होगा। पहली बार झूलनोत्सव का लाइव प्रसारण कराने की भी तैयारी की जा रही है।

शुभ मुहूर्त
निर्धारित शुभ मुहूर्त में 15 अगस्त की शाम सात बजे रामलला को विशेष रूप से सुसज्जित चांदी के दिव्य झूले पर विराजमान कराया जाएगा। इसके पहले झूलनोत्सव की शुरुआत सावन शुक्ल पंचमी यानी नाग पंचमी के आसपास होती रही है, लेकिन इस बार धार्मिक परंपरा में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए इसे सावन शुक्ल तृतीया से प्रारंभ किया जा रहा है।

ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान करेगा
यह बदलाव राम जन्मभूमि पर लंबे संघर्ष के बाद भव्य मंदिर में विराजमान रामलला के झूलनोत्सव को नई भव्यता और ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान करेगा।

आचार्य इंद्रदेव मिश्र धार्मिक अनुष्ठानों के व्यवस्थापक नियुक्त
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों को और व्यवस्थित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मंदिर की धार्मिक समिति ने आचार्य इंद्रदेव मिश्र को धार्मिक अनुष्ठानों का व्यवस्थापक नियुक्त किया है। शनिवार को हुई धार्मिक समिति की बैठक में उनके मनोनयन पर सहमति बनी और उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा गया।

पढ़ें :- 'योगी के दोबारा CM बनने पर यूपी के स्कूलों में पढ़ाई जाएगी वैदिक मैथ्स!' राजनाथ सिंह ने अयोध्या में किया बड़ा ऐलान

आचार्य इंद्रदेव मिश्र लंबे समय से कारसेवक पुरम स्थित वेद विद्यालय के प्राचार्य के रूप में कार्यरत हैं। राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही वह मंदिर में वैदिक अनुष्ठानों, पूजा-पद्धति और धार्मिक परंपराओं के निर्वहन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

Advertisement