लखनऊ: बार काउंसिल के चुनाव में लखनऊ हाईकोर्ट परिसर में मंगलवार को हंगामा हो गया। बता दें कि शाम लगभग 4 बजे, जब मतदान चल रहा था, एक वकील ने देखा कि बैलेट पेपर पर एक प्रत्याशी के नाम के आगे पहले से ही टिक लगा हुआ था। यह देख वकीलों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने पर्चे फाड़कर फेंक दिए। कुर्सियां और मेज भी गिरा दी गई और चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से बाधित हो गई। वकीलों का आरोप था कि चुनाव के नाम पर मजाक किया जा रहा है और यह पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं है। हंगामा फैलने के तुरंत बाद मतदान प्रक्रिया को रोक दिया गया। कई वकील परिसर के अंदर ही नारेबाजी करने लगे, जबकि कुछ बाहर बैठकर चुनाव का बहिष्कार करने पर मजबूर हो गए।
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लखनऊ-
बैलट पेपर बवाल के मद्देनजर बार कौंसिल का चुनाव लखनऊ में स्थगित कर दिया गया है !! pic.twitter.com/3asVFUPQnG
— Gaurav Singh Sengar (@sengarlive) January 27, 2026
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लखनऊ समेत प्रदेश के 17 जिलों में बार काउंसिल के चुनाव आयोजित किए गए हैं। वकीलों को शाम 5 बजे तक मतदान करना था, लेकिन लखनऊ में यह प्रक्रिया शाम 4 बजे ही स्थगित करनी पड़ी। इस पर रिटर्निंग ऑफिसर न्यायमूर्ति एआर मसूदी ने केवल लखनऊ परिसर का चुनाव स्थगित करने का आदेश दिया।
नामांकन में खर्च 1.50 लाख रुपए
बार काउंसिल के सदस्य पद के लिए कुल 333 वैध प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। प्रत्येक प्रत्याशी को नामांकन शुल्क के रूप में 1.50 लाख रुपए जमा करने पड़े। इसके अलावा 80 जिलों की मतदाता सूची के लिए प्रत्याशियों को अतिरिक्त 25 हजार रुपए का भुगतान भी करना पड़ा।
चुनाव अधिकारी और बार काउंसिल के सचिव आरके शुक्ला के अनुसार, चुनाव की सभी प्रक्रियाएं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित हाईपावर इलेक्शन कमेटी की निगरानी में संपन्न कराई जा रही हैं। चार चरणों में पूरे प्रदेश में कुल 2,49,808 अधिवक्ता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
जानें हंगामा किस वजह से हुआ
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जानकारी के अनुसार, शाम 4 बजे एक वकील ने जब मतदान किया, तो उन्होंने देखा कि बैलेट पेपर पर पहले से ही एक उम्मीदवार के नाम के आगे टिक लगा हुआ था। इस पर उन्होंने हंगामा मचाया। इसके बाद अन्य वकील भी शामिल हो गए और मतदान स्थल पर पर्चे फाड़ने, कुर्सियां और मेज गिराने जैसी घटनाएं हुईं। इस घटना के बाद लखनऊ में मतदान स्थगित कर दिया गया, लेकिन अन्य 16 जिलों में चुनाव अपने निर्धारित समय तक जारी रहा।
निष्पक्षता पर उठे सवाल
वकीलों का कहना है कि ऐसी घटनाएं चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने प्रशासन से शिकायत की है कि लखनऊ में मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।