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संसद मार्च से पहले सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए सरकार और विपक्ष के सामने रखीं ये तीन शर्तें

By Abhimanyu 
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Sonam Wangchuk’s condition for breaking his fast : नई दिल्ली में शिक्षा सुधारों और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संसद तक प्रस्तावित मार्च के लिए प्रदर्शनकारी इकट्ठा हो रहे हैं। लेकिन, पुलिस-प्रशासन की ओर से अब तक मार्च के लिए अनुमति दिये जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पायी है। इस बीच, सफदरगंज अस्पताल से सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने अपने अनशन को खत्म करने के लिए तीन शर्तें बतायी हैं।

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सोनम वांगचुक ने एक्स पोस्ट के माध्यम से अपना संदेश जारी किया। जिसमें लिखा, “मैं अपना उपवास कब खत्म करूंगा…! अपनी सेहत की परवाह किए बिना, मेरा उपवास ‘संसद चलो मार्च’ के बाद भी जारी रहेगा और इसे केवल इन हालात में ही तोड़ा जाएगा…” इसके साथ शेयर किए एक नोट में लिखा है- “प्रिय दोस्तों और समर्थकों, आप में से कई लोगों ने पूछा है कि मैं अपना अनशन कब खत्म करूंगा। जैसा कि मैंने पहले समर्थकों को बताया था, मैं 20 जुलाई को अपना अनशन खत्म करूंगा… अगर- a. सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल की नाकामियों (जैसे पेपर लीक वगैरह) की ज़िम्मेदारी ले।”

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वांगचुक के हवाले से इस नोट में आगे लिखा है- “या… b- अगर मैं और CJP की लीडरशिप संसद तक पहुँचें और वहाँ सम्मानित सांसद और अलग-अलग पार्टियों के नेता हमें भरोसा दिलाएँ कि वे अब संसद में यह मुद्दा उठाएँगे। c- अगर मेरी सेहत या दूसरी वजहों से ऐसा करना मुमकिन न हो, तो सम्मानित सांसद और अलग-अलग पार्टियों के नेता इस अस्पताल में आकर ऊपर बताया गया भरोसा दिलाएँ। सोनम वांगचुक, 19 जुलाई सफदरजंग अस्पताल में गैर-कानूनी नज़रबंदी से, जहाँ मेरे घूमने-फिरने, बोलने और बातचीत करने की आज़ादी पर रोक लगी हुई है।”

गौरतबल है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सोशल एक्टिविस्ट और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। जहां से शनिवार को दिल्ली पुलिस उन्हें जबरदस्ती उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई क्योंकि लंबी भूख हड़ताल के कारण उनमें डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखने लगे थे। हालांकि, वांगचुक ने इसे गैर-कानूनी हिरासत बताया है और वह अपने अनशन को खत्म न करने की जिद पर अड़े हुए हैं।

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