Bihar Politics : बिहार प्रदेश की राजनीति में और भाजपा की राजनीति में आज बड़ा दिन है। इस दिन का इंतजार भाजपा दशकों पहले से कर रही है। पार्टी की विचार धारा को सत्ता शीर्ष तक पहुंचाने जहां पार्टी को लंबा वक्त लगा, वहीं इस सुखमय दिन को देखने के लिए पार्टी की नींव माने जाने वाले बिहार प्रदेश के कुछ कददावर नेता अब नहीं रहे। एनडीए गठबंधन बनने के बाद भाजपा को बिहार में पांव पसारने और सत्ता में भागीदारी करने का अवसर समय समय पर मिलता रहा। राज्य की सत्ता में सहयोगी की भूमिका में और छोटे भाई की भूमिका से भाजपा ने अपना असर जनता के बीच बखूबी बनाया। चुनाव दर चुनाव पार्टी का प्रदर्शन सुधरता गया। पार्टी मजबूत होती गई और तालमेल से सत्ता के शीर्ष पर पहुंच गई।
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इस नये परिणाम के बाद राज्य में पार्टी की भूमिका छोटे भाई से बढ़कर बड़े भाई की हो गई। इसके पहले दिग्गज नेता नीतीश कुमार जब भी NDA में रहते हुए मुख्यमंत्री बने, उपमुख्यमंत्री भाजपा का ही रहा। अब पहली बार ऐसा होगा, जब बिहार में भाजपा का अपना मुख्यमंत्री होगा। अब सम्राट चौधरी की जिम्मेदारी होगी कि वह बिहार को उस प्वाइंट से आगे लेकर जाए, जहां नीतीश कुमार छोड़कर गए हैं।